केंद्र द्वारा एमएसपी में बढ़ोतरी का हवाला देकर 3500 रुपये प्रति क्विंटल की मांग, एग्रीस्टेक पंजीयन और डिजिटल क्रॉप सर्वे की विसंगतियों पर भी उठाए सवाल
महासमुंद। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी की दर 3100 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किए जाने पर पूर्व संसदीय सचिव एवं महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने साय सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने 27 अक्टूबर को हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णय को किसान विरोधी और निराशाजनक बताते हुए आरोप लगाया कि सरकार पिछले तीन वर्षों से किसानों को धान का एक ही दाम देकर उनके हितों की अनदेखी कर रही है।
विनोद चंद्राकर ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में केंद्र सरकार ने धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में लगभग 380 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। इसे ध्यान में रखते हुए इस वर्ष किसानों को कम से कम 3500 रुपये प्रति क्विंटल की दर मिलनी चाहिए थी। इसके विपरीत राज्य सरकार ने 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से ही धान खरीदी करने का निर्णय लिया है। उन्होंने इसे प्रदेश के किसानों के साथ अन्याय बताते हुए सरकार की किसान हितैषी नीतियों पर सवाल उठाए।
27.50 लाख किसानों से खरीदी, लेकिन दर पर असंतोष
चंद्राकर ने कहा कि सरकार 15 नवंबर से प्रदेश के 27.50 लाख से अधिक किसानों से प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान खरीदने की तैयारी कर रही है। खरीदी के लिए 360 नए केंद्र शुरू करने के साथ कुल 3100 उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था की जा रही है। हालांकि, उनके मुताबिक खरीदी की मात्रा और केंद्रों की संख्या बढ़ाने के बावजूद किसानों को अपेक्षित मूल्य नहीं मिल रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुराने दाम पर खरीदी कर उपलब्धियों का प्रचार करना चाहती है, जबकि किसानों की आय और उनकी उपज के उचित मूल्य पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
एग्रीस्टेक पंजीयन अनिवार्य होने से किसानों की चिंता
पूर्व विधायक ने धान खरीदी के लिए एग्रीस्टेक पंजीयन की अनिवार्यता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष पंजीकृत और एग्रीस्टेक आईडी वाले किसानों को दोबारा पंजीयन कराने की जरूरत नहीं होगी, लेकिन जिन किसानों का किसी कारण से पंजीयन नहीं हो पाया है, उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था स्पष्ट नहीं है।
चंद्राकर के अनुसार, यदि ऐसे किसानों की समस्या का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो उन्हें धान बेचने में परेशानी हो सकती है। उन्होंने सरकार से पंजीयन संबंधी समस्याओं के निराकरण के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की।
डिजिटल क्रॉप सर्वे की विसंगतियों पर उठाए सवाल
चंद्राकर ने डिजिटल क्रॉप सर्वे (डीसीएस) के माध्यम से धान के रकबे का ऑनलाइन निर्धारण किए जाने पर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि सर्वे में खसरा और रकबे से संबंधित विसंगतियां सामने आ रही हैं, जिससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि यदि रकबे का रिकॉर्ड गलत दर्ज हुआ, तो किसानों को सुधार कराने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। इससे खरीदी प्रक्रिया में देरी होगी और कुछ किसान निर्धारित समय में अपनी उपज बेचने से वंचित रह सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को खरीदी शुरू होने से पहले सर्वे की त्रुटियों को दूर करने और शिकायतों के त्वरित निराकरण की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
बायोमेट्रिक सत्यापन और खरीदी केंद्रों पर भी सवाल
पूर्व संसदीय सचिव ने कहा कि सरकार बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए वास्तविक किसानों से धान खरीदी सुनिश्चित करने की तैयारी कर रही है। लेकिन यदि किसान का रकबा ही गलत दर्ज है, तो केवल तकनीकी व्यवस्था बढ़ाने से उसकी समस्या का समाधान नहीं होगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों और जमीनी व्यवस्था के बीच अंतर है। चंद्राकर ने मांग की कि धान खरीदी से पहले पंजीयन, रकबा निर्धारण और डिजिटल सर्वे से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाए, ताकि किसी भी किसान को अपनी उपज बेचने से वंचित न होना पड़े।
उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और खरीदी प्रक्रिया को सरल बनाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।



