महासमुंद। विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) श्रेणी में शामिल भुंजिया समाज ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। समाज के प्रतिनिधियों द्वारा जिला प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया है कि 24 जून 2026 को महासमुंद जिला मुख्यालय से मुख्यमंत्री निवास तक पदयात्रा निकाली जाएगी। इस पदयात्रा का उद्देश्य भुंजिया और कमार जनजाति से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है।
समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि महासमुंद जिले में पीवीटीजी वर्ग के अंतर्गत आने वाले भुंजिया और कमार समुदाय के कई शिक्षित युवा आज भी रोजगार के अवसरों से वंचित हैं। उनका आरोप है कि अन्य जिलों में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया संचालित की जा रही है, लेकिन महासमुंद जिले के युवाओं को अपेक्षित अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।

रोजगार को लेकर उठाई प्रमुख मांग
ज्ञापन में समाज ने मांग की है कि पीवीटीजी श्रेणी के अंतर्गत आने वाले कमार और भुंजिया समुदाय के पात्र बेरोजगार युवाओं को तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर प्राथमिकता के आधार पर नियुक्ति दी जाए। समाज का मानना है कि रोजगार के अवसर मिलने से आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी।
वनाधिकार और आवासीय पट्टे की मांग
भुंजिया समाज ने अपनी दूसरी प्रमुख मांग के रूप में समुदाय के लोगों को आबादी पट्टा और वन पट्टा प्रदान करने की मांग उठाई है। समाज के अनुसार कई परिवार वर्षों से भूमि पर निवास कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें अधिकारिक दस्तावेज प्राप्त नहीं हो सके हैं। ऐसे में वनाधिकार और भूमि संबंधी अधिकार सुनिश्चित करना आवश्यक है।
पुनः सर्वेक्षण कराने की मांग
समाज ने तीसरी महत्वपूर्ण मांग के रूप में भुंजिया जनजाति के लोगों का पुनः सर्वेक्षण कराने की आवश्यकता जताई है। प्रतिनिधियों का कहना है कि पूर्व में किया गया सर्वेक्षण अभी तक अधूरा है, जिसके कारण कई परिवार सरकारी योजनाओं और सुविधाओं से वंचित रह गए हैं। इसलिए संबंधित अधिकारियों द्वारा नए सिरे से सर्वेक्षण कर वास्तविक स्थिति का आंकलन किया जाना चाहिए।
प्रशासन को दी गई पूर्व सूचना
पदयात्रा से पहले समाज की ओर से कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक तथा आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की जानकारी दी गई है। समाज ने प्रशासन से शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से पदयात्रा आयोजित करने में सहयोग की अपेक्षा जताई है।
अधिकार और विकास की मांग को लेकर एकजुट समाज

भुंजिया समाज का कहना है कि उनकी मांगें केवल रोजगार या भूमि अधिकार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समुदाय के समग्र विकास और सामाजिक न्याय से जुड़ी हुई हैं। पदयात्रा के माध्यम से समाज अपनी समस्याओं को शासन स्तर तक पहुंचाकर समाधान की उम्मीद कर रहा है।
आदिवासी समुदायों के अधिकारों, रोजगार और विकास से जुड़े इन मुद्दों को लेकर प्रस्तावित पदयात्रा आने वाले दिनों में महासमुंद जिले की एक महत्वपूर्ण सामाजिक गतिविधि के रूप में देखी जा रही है।





