दूरस्थ इलाकों में घरों से संचालित हो रहे केंद्र, नौनिहालों को न पोषण आहार मिल रहा, न सुरक्षित छत
मैनपुर। नौनिहालों को प्राथमिक शिक्षा की नींव देने और उन्हें कुपोषण से बचाने के लिए संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की हालत इन दिनों वनांचल क्षेत्रों में बेहद खराब है। ब्लॉक मुख्यालय के आसपास के केंद्रों की स्थिति तो ठीक-ठाक नजर आती है, लेकिन जैसे ही आप दूरस्थ, पहाड़ी और वनांचल क्षेत्रों का रुख करेंगे, तो हकीकत कुछ और ही बयां होती है। इन इलाकों में न तो समय पर बच्चों को पोषण आहार मिल पा रहा है और न ही उन्हें बैठने के लिए सुरक्षित भवन नसीब हो रहे हैं।
नींव खोदकर छोड़ दिया मटेरियल, घरों में चल रहे केंद्र

दूरस्थ क्षेत्रों में आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण में भारी लापरवाही बरती जा रही है। कई जगहों पर स्थिति ऐसी है कि भवन की नींव खोदकर निर्माण सामग्री (मटेरियल) वहीं पटक दी गई है और सालों बाद भी दीवारें नहीं खड़ी हो सकी हैं। ऐसे में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मजबूरी वश अपने निजी मकानों या झोपड़ियों में ही केंद्र संचालित करने को विवश हैं। अक्सर देखा जाता है कि विभाग के पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) भी इन दुर्गम इलाकों तक नियमित रूप से नहीं पहुंच पाते, जिसका सीधा खामियाजा ग्रामीण बच्चों को उठाना पड़ रहा है।

कुकडार गांव का हाल: 5 साल अधूरा रहा, अब बना तो खिड़कियां जर्जर

ऐसी ही एक तस्वीर दूरस्थ पहाड़ी इलाके ग्राम पंचायत आमामोरा के गांव कुकदर की है। यहां पिछले 5 वर्षों से आंगनबाड़ी भवन का निर्माण अधूरा पड़ा था। निर्माण एजेंसी काम अधूरा छोड़कर गायब हो गई थी। ‘दैनिक भास्कर’ ने इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित कर जिम्मेदारों को जगाया। इसके बाद विभाग हरकत में आया और अधूरे भवन का निर्माण कार्य फिर से शुरू कर उसे पूरा किया गया। लेकिन लापरवाही की हद देखिए— पुराने ढांचे में लगी जर्जर और टूट रही खिड़कियों को तक नहीं बदला गया। ये सड़ी-गली खिड़कियां कभी भी गिर सकती हैं, जो वहां पढ़ने वाले मासूम बच्चों के लिए बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती हैं।

खतरे को देख अधिकारियों ने लगाई रोक, जड़ा है ताला
टूटी खिड़कियों और संभावित खतरे को देखते हुए, संबंधित अधिकारियों ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को उस नए भवन में बच्चों को बैठाने से फिलहाल मना कर दिया है। नतीजा यह है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद आज भी उस आंगनबाड़ी भवन में ताला लटक रहा है और बच्चे उसके लाभ से वंचित हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
इस पूरे मामले को लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला अधिकारी वरुण नागेश ने कहा, “मैं खुद मौके पर पहुंचकर स्थिति को देखता हूं। जल्द ही जनपद सीईओ (JANPAD CEO) से आग्रह करके निर्माण की कमियों को दूर करवाकर इसे पूरी तरह सुरक्षित करवाया जाएगा।”
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि विभागीय दावों और लेटलतीफी के बीच, इन वनांचल क्षेत्रों के मासूम बच्चों को आखिर कब तक एक साफ-सुथरा और सुरक्षित आंगनबाड़ी भवन नसीब हो पाएगा।


