नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्र में 12 पाली के देवी-देवताओं का महासंगम, तीन दिवसीय मेले में रातभर चले सांस्कृतिक कार्यक्रम
मैनपुर | उदंती अभयारण्य की घनी पहाड़ियों के बीच स्थित देवगढ़ धाम चौकसिल में शरद पूर्णिमा के अवसर पर आस्था, प्रकृति और सांस्कृतिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। पहाड़ियों के बीच स्थित विशालकाय चट्टान पर शरद पूर्णिमा की चांदनी और ठंडी हवाओं ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। यहां आयोजित तीन दिवसीय मेले में स्थानीय ग्रामीणों के साथ आसपास के क्षेत्रों और अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचे।
12 पाली के देवी-देवताओं का हुआ भव्य स्वागत
ग्राम पंचायत कोयबा के अंतर्गत आने वाले साहेबिनकछार, करलाझर, नागेश, बम्हनीझोला, केंदुमिल, कोदोमाली, बंजारीबाहरा, कोठपारा, अमलीपड़ाव, झाकरपारा, नायकपारा, सरगीपारा और खसरपानी गांवों के देवी-देवताओं की परंपराओं से जुड़ा यह आयोजन देवगढ़ धाम बारहपाली समिति चौकसिल द्वारा किया गया।
मेले की शुरुआत परंपरा के अनुसार देवी-देवताओं के आगमन, निमंत्रण और स्वागत के साथ हुई। समिति के सदस्यों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर देवी-देवताओं की स्थापना की। इस दौरान आदिवासी समाज की पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं और रीति-रिवाजों की झलक देखने को मिली।
मां कुलेश्वरी महाभंडारा और रातभर चले सांस्कृतिक कार्यक्रम
मेले के दूसरे दिन देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना और आरती के बाद मुख्य आयोजन हुआ। अतिथियों का स्वागत किया गया और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंचन किया गया। रातभर चले कार्यक्रमों में लोगों ने उत्साह के साथ भाग लिया।
समिति की ओर से मां कुलेश्वरी महाभंडारा आयोजित किया गया। इसमें सुबह 8 बजे से रात 9 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था रही। आयोजकों के अनुसार, हजारों श्रद्धालुओं ने भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया।
मेले के तीसरे दिन देवी-देवताओं की पारंपरिक पूजा-अर्चना के बाद उन्हें ससम्मान विदाई दी गई। इसके साथ ही तीन दिवसीय मेले का समापन हुआ।
विशालकाय चट्टान और प्राचीन शिव मंदिर आकर्षण का केंद्र
देवगढ़ धाम चौकसिल की भौगोलिक स्थिति इस स्थल को विशेष पहचान देती है। उदंती अभयारण्य की पहाड़ियों में स्थित विशालकाय चट्टान के ऊपर प्राचीन शिव मंदिर श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा।
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी जब विशाल चट्टान और आसपास की हरी-भरी पहाड़ियों पर पड़ी, तो प्राकृतिक दृश्य मनमोहक हो उठा। श्रद्धालुओं और युवाओं ने इस खूबसूरत नजारे के बीच तस्वीरें लीं। विशाल चट्टान मेले में आने वाले लोगों के लिए प्रमुख आकर्षण बनी रही।
एसपी वेदव्रत सिरमौर और एसडीओपी ओ.पी. कुजूर भी पहुंचे

मेले में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने और आयोजन में शामिल होने के लिए गरियाबंद जिले के पुलिस अधीक्षक वेदव्रत सिरमौर तथा एसडीओपी ओ.पी. कुजूर भी पहुंचे। श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए पार्किंग सहित प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया था।
यह क्षेत्र पहले नक्सल प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में गिना जाता था। ऐसे क्षेत्र में धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी और सुरक्षा व्यवस्था विशेष महत्व रखती है। हालांकि, पूरे क्षेत्र के नक्सल मुक्त होने के दावे की आधिकारिक पुष्टि अलग से की जानी चाहिए।
आस्था, प्रकृति और आदिवासी संस्कृति का संगम
चारों ओर हरी-भरी पहाड़ियों से घिरा देवगढ़ धाम चौकसिल शरद पूर्णिमा मेले के दौरान धार्मिक आस्था और आदिवासी सांस्कृतिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र बना रहा। देवी-देवताओं की पूजा, सामूहिक भंडारा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने अलग-अलग गांवों के लोगों को एक साथ आने का अवसर दिया।


