फिजिकल वेरिफिकेशन ऐप में पॉलीगॉन बनाने की अनिवार्यता से बढ़ी परेशानी, खेतों में खड़ी है तैयार फसल; प्रशासन ने नोटिस के जवाब को असंतोषजनक मानते हुए की कार्रवाई
मैनपुर। गरियाबंद जिले के मैनपुर अनुभाग में फसल गिरदावरी और डिजिटल क्रॉप सर्वे में देरी को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। निर्धारित समय-सीमा में सर्वे कार्य पूरा नहीं करने वाले संबंधित पटवारियों के खिलाफ अनुविभागीय अधिकारी (SDM) एवं अनुविभागीय दंडाधिकारी मैनपुर ने निलंबन की कार्रवाई की है। प्रशासन ने इसे शासकीय कार्यों में लापरवाही और अनुशासनहीनता से जुड़ा मामला माना है।
वहीं, पटवारियों की ओर से सामने आ रही दलील के अनुसार, नए फिजिकल वेरिफिकेशन ऐप में खेतों का पॉलीगॉन बनाने की अनिवार्यता और तकनीकी प्रक्रिया के कारण सर्वे कार्य पूरा करने में अतिरिक्त समय लग रहा है। ऐसे में कार्रवाई के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि डिजिटल सर्वे में देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं का समाधान कैसे किया जाएगा।
नोटिस का जवाब संतोषजनक नहीं, आचरण नियमों के उल्लंघन का हवाला
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, डिजिटल क्रॉप सर्वे और फसल गिरदावरी के कार्य में निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर संबंधित पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उनसे तत्काल स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
प्रशासन ने संबंधित पटवारियों के जवाब को संतोषजनक नहीं मानते हुए शासकीय कार्यों के प्रति लापरवाही, अनुशासनहीनता और उदासीनता का मामला माना। इसके बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 का हवाला देते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई।
हालांकि, निलंबन आदेश की विस्तृत प्रति और संबंधित पटवारियों के नाम उपलब्ध नहीं होने के कारण इस स्तर पर कार्रवाई से जुड़े सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
भास्कर इनसाइड: आखिर क्यों उलझा गिरदावरी का काम?
डिजिटल क्रॉप सर्वे में देरी के पीछे केवल काम की धीमी गति ही नहीं, बल्कि नई तकनीकी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। गरियाबंद जिले में राजस्व पटवारी संघ ने सितंबर 2026 में पीवी ऐप के माध्यम से फसल गिरदावरी कराने की व्यवस्था पर आपत्ति जताई थी। संघ ने तकनीकी और व्यावहारिक कठिनाइयों का हवाला देते हुए पुरानी प्रक्रिया के जरिए काम कराने की मांग भी उठाई थी।
पटवारियों की ओर से सामने आ रही समस्याओं को तीन प्रमुख बिंदुओं में समझा जा सकता है।
1. पहले प्राइवेट सर्वेयरों से कराया जा रहा था सर्वे
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, डिजिटल क्रॉप सर्वे की शुरुआती व्यवस्था में प्राइवेट सर्वेयरों को काम सौंपा गया था। प्रति खसरा 10 रुपये भुगतान की व्यवस्था के तहत सर्वेयर को खेत पर पहुंचकर फसल की तस्वीरें लेकर ऑनलाइन अपलोड करनी होती थीं। इससे संबंधित सर्वे का रिकॉर्ड डिजिटल माध्यम से तैयार होता था।
2. फिजिकल वेरिफिकेशन ऐप से बढ़ी प्रक्रिया
इसके बाद शेष खसरों के भौतिक सत्यापन के लिए फिजिकल वेरिफिकेशन (PV) ऐप का इस्तेमाल शुरू हुआ। इस व्यवस्था में खेतों का भौतिक सत्यापन और संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान करना होता है। पटवारियों का कहना है कि नई प्रक्रिया में अतिरिक्त चरण जुड़ने से काम का बोझ बढ़ गया है।
3. तैयार फसल के बीच पॉलीगॉन बनाना चुनौती
पटवारियों के अनुसार, खेतों का पॉलीगॉन यानी डिजिटल नक्शे पर खेत की सीमा निर्धारित करने की प्रक्रिया और उसके बाद सत्यापन पूरा करने में समय लग रहा है। खेतों में फसल तैयार खड़ी होने के दौरान मौके पर जाकर यह प्रक्रिया पूरी करना व्यावहारिक चुनौती बन रहा है।
उनका कहना है कि तकनीकी प्रक्रिया को सरल बनाने, ऐप की समस्याओं को दूर करने और पर्याप्त समय देने से सर्वे कार्य अधिक प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकता है।
समस्या के समाधान की मांग, लेकिन कार्रवाई से बढ़ी नाराजगी
पटवारियों की दलील है कि सर्वे कार्य में आ रही तकनीकी और व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने के लिए विभागीय स्तर पर ठोस पहल की जरूरत है। उनका कहना है कि समय-सीमा में काम पूरा करना जरूरी है, लेकिन इसके लिए इस्तेमाल की जा रही व्यवस्था भी सुचारु होनी चाहिए।
दूसरी ओर, प्रशासन के सामने समय पर फसल गिरदावरी पूरी कराने की जिम्मेदारी है। डिजिटल क्रॉप सर्वे के आंकड़े किसानों की फसल संबंधी जानकारी और आगे की कृषि प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में सर्वे में देरी का असर किसानों से जुड़े कार्यों पर पड़ने की आशंका भी बनी रहती है।
प्रदेश के दूसरे जिलों में भी पीवी ऐप की प्रक्रिया और डिजिटल क्रॉप सर्वे को लेकर पटवारियों की आपत्तियां सामने आई हैं।
अब आगे क्या?
मैनपुर में पटवारियों के निलंबन के बाद अब निगाहें प्रशासन और राजस्व अमले के बीच आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। एक ओर समय-सीमा में गिरदावरी पूरी कराने का दबाव है, तो दूसरी ओर तकनीकी प्रक्रिया को लेकर कर्मचारियों की परेशानी के सवाल हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन सर्वे कार्य में तेजी लाने के लिए क्या कदम उठाता है और पटवारियों की ओर से बताई जा रही तकनीकी समस्याओं का समाधान किस तरह किया जाता है। फिलहाल, इस मामले ने मैनपुर में डिजिटल क्रॉप सर्वे की प्रक्रिया, जवाबदेही और मैदानी स्तर की चुनौतियों को चर्चा में ला दिया है।


