ओडिशा को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग पर हादसों का साया, सड़क किनारे गहरी खाइयां और टूटे शोल्डर से बढ़ा खतरा; बारिश में मिट्टी डालकर मरम्मत का आरोप
मैनपुर । गरियाबंद जिले से होकर ओडिशा को जोड़ने वाला NH-130C इन दिनों सड़क की खराब स्थिति को लेकर चर्चा में है। खासकर झरियाबाहरा से मदांगमुड़ा के बीच सड़क के किनारे बने गड्ढे और क्षतिग्रस्त शोल्डर वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। हाल में इसी मार्ग पर एक ट्रैक्टर सड़क किनारे गड्ढे में पहिया धंसने के बाद अनियंत्रित होकर पलटते-पलटते बचा। घटना ने सड़क की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय रिपोर्टों में भी झरियाबाहरा से मदांगुड़ा-गोहरापदर क्षेत्र के बीच NH-130C की संकरी सड़क और गड्ढों को लेकर चिंता जताई गई है। अगस्त 2026 में सड़क की खराब स्थिति को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुआ था।
सामने से वाहन आए तो साइड लेना चुनौती
इस मार्ग के कई हिस्सों में सड़क की चौड़ाई कम है। घने जंगलों के बीच गुजरने वाले इस रास्ते पर जब दो बड़े वाहन आमने-सामने आते हैं तो साइड देने के लिए एक वाहन को सड़क के किनारे उतरना पड़ता है।
यहीं सबसे बड़ा खतरा है। सड़क के किनारों का डामर कई जगह टूट चुका है और शोल्डर की जगह गड्ढे और खाईनुमा हिस्से नजर आते हैं। ऐसे में वाहन का पहिया जैसे ही सड़क से नीचे जाता है, चालक के लिए वाहन को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।
शनिवार को ट्रैक्टर के साथ हुई घटना ने इसी खतरे को सामने ला दिया। पहिया गड्ढे में धंसने के बाद ट्रैक्टर असंतुलित हुआ, लेकिन बड़ा हादसा होने से बच गया।
बारिश में और खतरनाक हो जाते हैं गड्ढे
स्थानीय वाहन चालकों का आरोप है कि सड़क के किनारों की मरम्मत के नाम पर कई बार मिट्टी डालकर काम चलाया जाता है। बारिश होने के बाद यही मिट्टी पानी के साथ बह जाती है और सड़क के किनारे दोबारा गड्ढे बन जाते हैं।
इससे बारिश के दिनों में समस्या और गंभीर हो जाती है। गड्ढों में पानी भर जाने के कारण उनकी गहराई का अंदाजा वाहन चालकों को नहीं लग पाता। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से जोखिम भरी हो सकती है।
NH-130C को चौड़ा करने की योजना पहले से दर्ज
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से जुड़े दस्तावेजों में NH-130C के इस कॉरिडोर को दो/चार लेन और पक्के शोल्डर के साथ अपग्रेड करने की योजना दर्ज है। सरकारी दस्तावेज के अनुसार अभनपुर-राजिम-गरियाबंद-बारदुला-देवभोग-ओडिशा सीमा वाले हिस्से के एक पैकेज में सड़क को दो/चार लेन तथा पक्के शोल्डर के साथ विकसित करने का प्रस्ताव है।
सरकारी दस्तावेज यह भी बताता है कि मौजूदा सड़क की चौड़ाई और पर्याप्त सुरक्षा सुविधाओं की कमी दुर्घटना के जोखिम से जुड़ी प्रमुख चिंताओं में शामिल रही है।
बारिश में NH-130C पर पहले भी बिगड़े हालात
यह मार्ग बारिश के दौरान पहले भी प्रभावित होता रहा है। सितंबर 2026 में लगातार बारिश के दौरान NH-130C के कुछ हिस्सों में पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ था। रायपुर-देवभोग मार्ग पर यात्रियों से भरी बस के नाले में फंसने की घटना भी सामने आई, जिसके बाद पुलिस और ग्रामीणों ने रस्सी की मदद से यात्रियों को सुरक्षित निकाला।
जुलाई 2026 में भी भारी बारिश के बाद गरियाबंद जिले में सड़क संपर्क प्रभावित होने की खबरें सामने आई थीं।
ओडिशा जाने वाले वाहनों के लिए अहम रास्ता
NH-130C गरियाबंद जिले को देवभोग होते हुए ओडिशा सीमा से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। इस सड़क पर स्थानीय ग्रामीणों के साथ यात्री बसों, मालवाहक वाहनों और निजी वाहनों की आवाजाही रहती है।
ऐसे में सड़क किनारे के टूटे हिस्सों और गहरे गड्ढों को केवल सामान्य मरम्मत से छोड़ना वाहन चालकों के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। ग्रामीणों की मांग है कि सड़क के शोल्डर को व्यवस्थित तरीके से बनाया जाए और जहां सड़क क्षतिग्रस्त है, वहां स्थायी तकनीकी मरम्मत कराई जाए।
ग्रामीणों की मांग—मिट्टी नहीं, पक्का समाधान चाहिए
स्थानीय ग्रामीणों और वाहन चालकों का कहना है कि सड़क के किनारे गड्ढों में केवल मिट्टी डालने के बजाय पक्की मरम्मत की जरूरत है। सड़क के दोनों ओर शोल्डर को मजबूत करने, खतरनाक हिस्सों की पहचान कर संकेतक लगाने और संकरे हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था सुधारने की मांग की जा रही है।
एक ट्रैक्टर पलटने से बचा है, लेकिन सड़क की मौजूदा स्थिति में सवाल यही है कि जिम्मेदार विभाग स्थायी सुधार कब करेगा। किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई होने के बजाय पहले से ही खतरनाक हिस्सों को सुरक्षित करना जरूरी है।



