बलरामपुर। जिले के ग्राम पंचायत भानोरा के भीतर भानोरा क्षेत्र में शासकीय भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि भू-माफिया और कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा धीरे-धीरे सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया जा रहा है, जिससे भविष्य में गांव की सार्वजनिक सुविधाएं और सांस्कृतिक परंपराएं प्रभावित हो सकती हैं।
भीतर भानोरा में लगभग साढ़े तीन एकड़ भूमि शासन के नाम पर दर्ज है, जिसे विभिन्न जनहित एवं विकास कार्यों के लिए अधिकृत किया गया है। इसी भूमि पर आंगनबाड़ी केंद्र, शासकीय सामुदायिक शौचालय का निर्माण किया गया है तथा वर्तमान में जल जीवन मिशन के अंतर्गत पानी की टंकी का निर्माण कार्य भी जारी है।
ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों और लाखों रुपये की योजनाएं जमीन पर संचालित हो रही हैं, लेकिन सामुदायिक शौचालय तक पहुंचने के लिए आज तक अधिकृत मार्ग उपलब्ध नहीं हो सका है। आरोप है कि आसपास के लोगों द्वारा लगातार सरकारी भूमि पर कब्जा किए जाने के कारण सार्वजनिक उपयोग के लिए पर्याप्त जगह और आवागमन का रास्ता सिकुड़ता जा रहा है।

स्थानीय निवासी राहुल सिंह ने बताया कि यह शासकीय भूमि वर्षों से गांव की सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रही है। हर वर्ष पूरे गांव के लोग इसी परिसर में पारंपरिक रूप से होलिका दहन का आयोजन करते हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि अतिक्रमण की यह स्थिति जारी रही तो आने वाले वर्षों में ग्रामीणों के पास त्योहार और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए भी पर्याप्त स्थान नहीं बचेगा।
ग्रामीणों के अनुसार यह जमीन पूरे गांव की सामुदायिक संपत्ति है, जिसका उपयोग सार्वजनिक हित में किया जाना चाहिए। लेकिन लगातार बढ़ते अतिक्रमण के कारण इसकी मूल पहचान और उपयोगिता खतरे में पड़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो भविष्य में सार्वजनिक कार्यक्रमों, विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं के लिए भूमि का गंभीर अभाव उत्पन्न हो सकता है।
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर, राजस्व विभाग एवं संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि शासकीय भूमि की तत्काल पैमाइश कराई जाए, अतिक्रमण की जांच कर अवैध कब्जों को हटाया जाए तथा भूमि की सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जाए। साथ ही सामुदायिक शौचालय और जल जीवन मिशन के तहत बन रही पानी की टंकी तक पहुंचने के लिए स्थायी और सुगम मार्ग भी सुनिश्चित किया जाए।
अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और सार्वजनिक उपयोग की इस महत्वपूर्ण भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए कब तक ठोस कदम उठा
ए जाते हैं।






