मैनपुर। विश्व बाघ दिवस के अवसर पर वन विभाग की ओर से शासकीय हाई स्कूल कुल्हाड़ीघाट में विद्यार्थियों के बीच जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को बाघ संरक्षण, वन्यप्राणियों के महत्व और पर्यावरण संतुलन में उनकी भूमिका के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान परिक्षेत्र अधिकारी कुल्हाड़ीघाट श्री दिनेश चौधरी ने विद्यार्थियों से बाघ संरक्षण को लेकर सार्थक परिचर्चा की। उन्होंने बच्चों को बताया कि बाघ केवल एक वन्यप्राणी नहीं, बल्कि वन पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बाघ सहित अन्य वन्यप्राणियों और उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण पूरे वन पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए जरूरी है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) भी बाघ को एक ऐसी महत्वपूर्ण प्रजाति के रूप में रेखांकित करता है, जिसके संरक्षण से उसके आवास और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण में भी मदद मिलती है।
विद्यार्थियों से हुई वन्यजीव संरक्षण पर चर्चा
परिक्षेत्र अधिकारी दिनेश चौधरी ने विद्यार्थियों को वन और वन्यप्राणियों के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता के बारे में जानकारी दी। इस दौरान बच्चों ने भी बाघ, जंगल और वन्यजीवों से जुड़े विषयों पर अपनी जिज्ञासाएं रखीं।
परिचर्चा के दौरान विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि जंगल केवल पेड़-पौधों का समूह नहीं है, बल्कि इसमें रहने वाले वन्यजीव भी पर्यावरणीय संतुलन का अहम हिस्सा हैं। बाघों के प्राकृतिक आवास और वन क्षेत्रों को सुरक्षित रखना दीर्घकालीन पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक है।
चित्रकला और क्विज प्रतियोगिता में बच्चों ने लिया हिस्सा
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के लिए चित्रकला एवं क्विज प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
चित्रकला के माध्यम से बच्चों ने बाघ और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विषयों को कागज पर उकेरा। वहीं क्विज प्रतियोगिता के जरिए विद्यार्थियों के वन्यजीवों, जंगल और पर्यावरण से जुड़े ज्ञान को परखा गया।
वन एवं वन्यप्राणियों के संरक्षण का दिया संदेश
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को वन्यप्राणियों के प्रति संवेदनशील रहने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाने का संदेश दिया गया। वन विभाग की ओर से इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों को बच्चों तक संरक्षण का संदेश पहुंचाने का प्रभावी माध्यम माना जाता है।
NTCA के अनुसार बाघ संरक्षण के तहत बाघों की निगरानी, उनके आवास का संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना और जागरूकता जैसे विभिन्न पहलुओं पर काम किया जाता है।
वन विभाग और स्कूल स्टाफ रहा मौजूद
कार्यक्रम के अवसर पर कुल्हाड़ीघाट परिक्षेत्र का वन विभाग स्टाफ तथा शासकीय हाई स्कूल कुल्हाड़ीघाट के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे। वन विभाग के अधिकारियों और शिक्षकों ने विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि जंगल और वन्यजीव सुरक्षित रहेंगे, तभी पर्यावरण का संतुलन बना रहेगा। विद्यार्थियों में वन्यजीव संरक्षण के प्रति समझ विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित यह कार्यक्रम जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।





