बस्तर। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मिलने वाले सस्ते एवं मुफ्त राशन की व्यवस्था में अपात्र लोगों के लाभ लेने की आशंका सामने आई है। बस्तर जिले में राशन कार्डों के डिजिटल सत्यापन के दौरान कुल 19,905 संदिग्ध रिकॉर्ड मिले हैं। इनमें आधार संबंधी विसंगतियां, डुप्लीकेट नाम, आयकरदाता, ईपीएफओ से जुड़े नौकरीपेशा लोग और सरकारी कर्मचारियों के रिकॉर्ड शामिल हैं। ब्लॉकवार आंकड़ों में बकावंड सबसे आगे है, जहां 5,798 संदिग्ध रिकॉर्ड चिह्नित किए गए हैं।
डिजिटल जांच में सामने आए इन आंकड़ों ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की पात्रता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। आखिर पात्रता की शर्तें लागू होने के बावजूद ऐसे नाम राशन कार्डों की सूची में कैसे शामिल हुए? क्या इन रिकॉर्ड के जरिए अपात्र लोग सरकारी राशन का लाभ ले रहे थे? इन सवालों का जवाब अब प्रशासनिक सत्यापन के बाद ही मिल सकेगा।
पंचायतों और नगरीय निकायों को सौंपी गई जांच की जिम्मेदारी
डेटा मिलान में विसंगतियां सामने आने के बाद प्रशासन ने संदिग्ध रिकॉर्ड का ब्लॉकवार सत्यापन शुरू कराया है। इस काम को जल्द पूरा करने के लिए पंचायतों और नगरीय निकायों को जिम्मेदारी दी गई है।
खाद्य नियंत्रक घनश्याम सिंह राठौर के मुताबिक, केंद्र सरकार की ओर से चिह्नित संदिग्ध रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। पहले चरण के सत्यापन में अब तक करीब 13 हजार लोगों की जांच की जा चुकी है। दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति का मिलान होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कितने लोग वास्तव में अपात्र हैं और कितने मामलों में तकनीकी या दस्तावेजी त्रुटियां सामने आई हैं।
6,767 आधार विसंगतियां, 3,676 डुप्लीकेट रिकॉर्ड
डिजिटल जांच में अलग-अलग श्रेणियों में संदिग्ध रिकॉर्ड सामने आए हैं। इनमें 6,767 आधार संबंधी विसंगतियां और 3,676 डुप्लीकेट नाम शामिल हैं। इसके अलावा सालाना 6 लाख रुपये से अधिक आय वाले 2,044 आयकरदाता, ईपीएफओ के तहत सालाना 1.80 लाख रुपये से अधिक कमाने वाले 336 लोग और केंद्र सरकार के 14 कर्मचारी चिह्नित किए गए हैं।
कंपनी डायरेक्टर के रूप में दर्ज 59 लोगों के नाम भी जांच के दायरे में हैं। वहीं, 25 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति या लेन-देन से जुड़े 203 रिकॉर्ड सामने आए हैं।
बकावंड में सबसे ज्यादा 5,798 संदिग्ध रिकॉर्ड
ब्लॉकवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बकावंड में सबसे ज्यादा संदिग्ध रिकॉर्ड मिले हैं। इसके बाद जगदलपुर ग्रामीण और बस्तर ब्लॉक का स्थान है।
- बकावंड ब्लॉक – 5,798
- जगदलपुर ग्रामीण – 3,295
- बस्तर ब्लॉक – 2,699
- बास्तानार ब्लॉक – 956
- बस्तर शहरी क्षेत्र – 217
इन आंकड़ों के आधार पर प्रशासन के सामने अब जमीनी स्तर पर सत्यापन की बड़ी चुनौती है। जांच में राशन कार्ड में दर्ज परिवार के सदस्यों, आधार विवरण, आय संबंधी दस्तावेजों और नौकरी की जानकारी का मिलान किया जाएगा।
डिजिटल मिलान से सामने आती हैं विसंगतियां: फूड इंस्पेक्टर
भास्कर एक्सपर्ट | पायल वर्मा, फूड इंस्पेक्टर
फूड इंस्पेक्टर पायल वर्मा के अनुसार, आधार, आयकर, ईपीएफओ, सरकारी सेवा और राशन कार्ड के रिकॉर्ड का डिजिटल मिलान करने से दोहरे नाम, आय संबंधी विसंगतियां और संदिग्ध पात्रता वाले मामले सामने आ सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक रिकॉर्ड में दर्ज है या उसकी आय संबंधी जानकारी और राशन कार्ड के विवरण में अंतर है, तो सिस्टम ऐसे मामलों को जांच के लिए चिह्नित कर सकता है।
हालांकि, डिजिटल डेटा में विसंगति मिलना अपने आप में धोखाधड़ी का प्रमाण नहीं है। पुराने रिकॉर्ड, गलत प्रविष्टि या डेटाबेस अपडेट नहीं होने के कारण भी ऐसी स्थिति बन सकती है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को अपात्र घोषित करने या कार्रवाई करने से पहले उसके दस्तावेजों, परिवार की वास्तविक स्थिति और लागू पात्रता नियमों का सत्यापन जरूरी है।
अब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि 19,905 संदिग्ध रिकॉर्ड में से कितने वास्तव में अपात्र हैं और कितने मामले केवल तकनीकी या दस्तावेजी त्रुटियों से जुड़े हैं


