राधे पटेल/ गरियाबंद
गरियाबंद जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जिले में मदिरा प्रेमियों के बीच हाहाकार मचा हुआ है। पिछले पांच दिनों से देसी शराब की सप्लाई पूरी तरह से ठप हो गई है। आलम यह है कि शराब की तलाश में लोग एक गांव से दूसरे गांव के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है।
मामला यह है कि सिर्फ देसी ही नहीं, बल्कि अंग्रेजी शराब की दुकानों का भी यही हाल है। दुकानों से शराब पूरी तरह गायब है और ग्राहकों को केवल बियर थमाई जा रही है। सुबह से ही दुकानों के बाहर लंबी लाइनें लग रही हैं, लेकिन मदिरा न मिलने से लोगों में भारी आक्रोश है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि अब लोग शराब के लिए पड़ोसी जिलों का रुख करने लगे हैं।
इस पूरी किल्लत के पीछे की असली सच्चाई को लेकर हो रहा है। प्रशासन की नाक के नीचे इस कमी का फायदा उठाकर अवैध शराब माफिया सक्रिय हो गए हैं। गांव-गांव में महुए की देसी शराब धड़ल्ले से और मनमाने दामों पर बेची जा रही है। चोरी-छिपे हो रही इस ब्लैक मार्केटिंग से न केवल अपराध को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि शासन को हर दिन करोड़ों रुपये के राजस्व का चूना भी लग रहा है।
आबकारी विभाग के अधिकारी इस मामले पर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। सूत्रों की मानें तो यह परिवहन समस्या, गोदामों में स्टॉक की कमी या ठेके से जुड़ी कोई तकनीकी खामी हो सकती है। फिलहाल अधिकारियों ने जल्द ही स्थिति सामान्य करने का आश्वासन दिया है। वहीं दूसरी ओर, कई सामाजिक संगठनों ने इस मौके को भुनाते हुए लोगों से शराब और नशे से पूरी तरह दूरी बनाने की अपील शुरू कर दी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस शराब संकट और अवैध बिक्री पर कब तक लगाम लगा पाता है।


