बच्चों ने प्रकाश के वैज्ञानिक प्रयोग किए, गौरा-गौरी, राउत नाचा और सुवा नृत्य से दिखाई छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक
मैनपुर। विकासखंड मैनपुर के वनांचल क्षेत्र स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला गोना में दीपावली पर्व के अवसर पर शिक्षा, विज्ञान और छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। यहां बच्चों ने वैज्ञानिक प्रयोगों के जरिए प्रकाश के सिद्धांतों को समझा, वहीं पारंपरिक लोकनृत्यों की प्रस्तुति देकर अपनी सांस्कृतिक विरासत का परिचय दिया।
प्रयोगों से समझा प्रकाश का विज्ञान
कार्यक्रम में शिक्षक पेश्वर यादव ने विद्यार्थियों के साथ प्रकाश से संबंधित विभिन्न रोचक वैज्ञानिक प्रयोग किए। बच्चों ने प्रयोगों के माध्यम से प्रकाश का परावर्तन, अपवर्तन, प्रकीर्णन और छाया निर्माण जैसी घटनाओं को समझा। इस गतिविधि से विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के बजाय प्रयोग करके विज्ञान सीखने का अवसर मिला।
गौरा-गौरी और सुवा नृत्य ने मोहा मन
आयोजन में छत्तीसगढ़ की लोकपरंपराओं की भी आकर्षक झलक देखने को मिली। विद्यार्थियों ने गौरा-गौरी, राउत नाचा और सुवा नृत्य की प्रस्तुतियां देकर ग्रामीण परिवेश को लोकसंस्कृति के रंगों से सराबोर कर दिया। पारंपरिक गीतों और नृत्यों के माध्यम से बच्चों ने अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति उत्साह प्रदर्शित किया।
पांच दीपों से दिया सामाजिक जागरूकता का संदेश
कार्यक्रम में बच्चों ने दीपों के माध्यम से समाज को पांच महत्वपूर्ण संदेश दिए। इनमें शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, मानवता, प्रेम एवं भाईचारा, स्वच्छता और सुरक्षित दीपावली मनाने का आह्वान शामिल रहा। बच्चों ने संदेश दिया कि दीपावली केवल रोशनी और उत्सव का पर्व नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और अच्छे संस्कारों का प्रकाश फैलाने का अवसर भी है।
शिक्षा के साथ संस्कार और वैज्ञानिक सोच पर जोर
आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के साथ उन्हें अपनी लोकसंस्कृति, सामाजिक जिम्मेदारियों और मानवीय मूल्यों से जोड़ना था। संपूर्ण कार्यक्रम विद्यालय के प्रधान पाठक सूरज प्रसाद पात्र एवं शिक्षक पेश्वर यादव के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।




