मैनपुर: गरियाबंद जिले में लोक निर्माण विभाग (PWD) के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और तकनीकी प्लानिंग पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कुल्हाड़ीघाट से ओडिशा को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग ग्राम जिडार पर बना पुल महज एक साल के भीतर ही जवाब देने लगा है। विभाग की अदूरदर्शिता और गलत एस्टीमेट के कारण अब इस पुल और सड़क के अस्तित्व पर ही खतरा मंडराने लगा है।
बस्ती के पानी से बहने लगी सड़क, उखड़ने लगी सड़क जिडार बस्ती और पहाड़ी से नीचे उतरने वाले पानी के तेज बहाव के कारण पुल के किनारे की मिट्टी तेजी से बह रही है। मिट्टी के कटाव से डामरीकृत सड़क किनारे से उखड़ने लगी है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि सुरक्षा के लिए पुल के किनारे लगाए गए सांकेतिक बोर्ड (Signboards) भी उखड़ कर गिर गए हैं। यदि कटाव की यही स्थिति रही, तो धीरे-धीरे पूरी सड़क ही उखड़ जाएगी।
एस्टीमेट में तकनीकी खामी: एक साल में ही फेल हुई प्लानिंग स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुल मुख्य रूप से पहाड़ी और बस्ती के पानी की उचित निकासी के लिए ही बनाया गया था, क्योंकि इससे पहले भी पानी के बहाव से यहां की सड़क उखड़ गई थी। लेकिन, दुर्भाग्यवश लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और इंजीनियरों ने इसका एस्टीमेट बनाते समय भारी लापरवाही बरती।
पानी के भारी दबाव और बहाव क्षेत्र को नजरअंदाज करते हुए यहाँ केवल ‘सिंगल पुल’ (Single Culvert) डालकर निर्माण कार्य की औपचारिकता पूरी कर दी गई। नतीजतन, पानी की निकासी ठीक से न हो पाने के कारण महज एक साल के भीतर ही यहां फिर से नया पुल बनाने या भारी मरम्मत करने की नौबत आ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि विभाग ने एस्टीमेट बनाते समय दूरदर्शिता दिखाई होती, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती।
समय रहते नहीं चेता विभाग, तोग्रामीणों को होगी दिक्कत आने वाले दिनों में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा और भारी बारिश का दौर शुरू होगा। ऐसे में पानी का बहाव और भी भयंकर रूप ले लेगा। यदि PWD के अधिकारियों ने समय रहते इस उखड़ती सड़क और पुल के किनारे हो रहे मिट्टी के कटाव की मरम्मत (Repairing) पर ध्यान नहीं दिया, तो पूरी सड़क के पानी में बह जाने की प्रबल आशंका है।
ऐसा होने पर ग्राम जिडार एवं कुल्हाड़ीघाट, ओडिशा और आसपास के इलाकों से आने जाने वाले आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र के ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। रात में सफर करने वालो के लिए जानलेवा हो सकता है यह पुल ! अब देखना यह होगा कि इस बदहाल होती स्थिति को देखकर प्रशासन समय रहते जागता है, या फिर सड़क के पूरी तरह बह जाने का इंतजार करता है।





