रायगढ़। रायगढ़ जिला जेल एक बार फिर विवादों और गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। जिला जेल में निरुद्ध बंदी संजय बघेल की इलाज के दौरान मेडिकल कॉलेज अस्पताल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन अस्पताल पहुंचे और वहां जमकर हंगामा किया। इसके बाद उन्होंने जेल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की है।

मृतक के परिजनों का आरोप है कि संजय बघेल के साथ जेल के भीतर मारपीट की गई थी, जिसके चलते उसकी हालत बिगड़ गई। परिजनों का कहना है कि जब उन्होंने शव को देखा तो उसके शरीर पर कई स्थानों पर चोट के निशान दिखाई दिए। इससे उन्हें संदेह है कि बंदी के साथ जेल के अंदर अमानवीय व्यवहार किया गया है।
घटना से आक्रोशित परिजनों ने मेडिकल कॉलेज परिसर में विरोध प्रदर्शन करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सके।
हालांकि, दूसरी ओर जेल अधीक्षक ने परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। जेल प्रशासन का कहना है कि बंदी की तबीयत खराब होने पर उसे तत्काल उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हुई। जेल प्रबंधन ने मारपीट या किसी भी प्रकार की प्रताड़ना के आरोपों को निराधार बताया है।
गौरतलब है कि रायगढ़ जिला जेल इससे पहले भी विभिन्न घटनाओं को लेकर सुर्खियों में रह चुकी है। ऐसे में बंदी की संदिग्ध मौत ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई से आम जनता में कानून व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ता दिखाई दे रहा था, वहीं इस घटना ने व्यवस्था पर नए सिरे से प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
फिलहाल पूरे मामले में मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है। यह जांच का विषय है कि बंदी की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, बीमारी के चलते हुई या फिर इसके पीछे कोई अन्य वजह है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के लिए कौन जिम्मेदार है और क्या किसी स्तर पर लापरवाही या अन्य गंभीर तथ्य सामने आते हैं।
अब सभी की निगाहें प्रशासनिक और न्यायिक जांच पर टिकी हुई हैं, जिससे इस रहस्यमय मौत के पीछे की सच्चाई सामने आ सके।





