ठेकेदारों पर किश्त की राशि लेकर निर्माण अधूरा छोड़ने का आरोप; जिला पंचायत सीईओ के एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश के 15 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं होने से उठे सवाल
मैनपुर। गरीब परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराने के लिए सरकार आवास योजनाओं के माध्यम से करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन मैनपुर ब्लॉक के दूरस्थ गांवों में योजना की जमीनी हकीकत चिंताजनक है। यहां विशेष पिछड़ी जनजाति कमार समुदाय के कई परिवार आज भी पक्के मकान के इंतजार में झोपड़ियों और कच्चे घरों में रहने को मजबूर हैं। वर्ष 2021-22 में स्वीकृत आवास भी कई साल बाद अधूरे पड़े हैं। हितग्राहियों का आरोप है कि उन्होंने आवास निर्माण की किश्तें ठेकेदारों को दे दीं, लेकिन राशि लेने के बाद ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर चले गए।
बेहराडीह सहित कई गांवों में अधूरे पड़े आवास
मैनपुर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत बोइरगांव के आश्रित ग्राम बेहराडीह के अलावा नारीपानी, कवराआम, बड़ेगोबरा, भाटापानी और जांगड़ा जैसे गांवों में भी आवास निर्माण की स्थिति संतोषजनक नहीं बताई जा रही है। कई कमार परिवारों के मकान अधूरे हैं। कहीं दीवारें खड़ी हैं तो कहीं छत का निर्माण तक नहीं हुआ है। ऐसे में हितग्राही पुराने कच्चे मकानों और झोपड़ियों में जीवन गुजार रहे हैं।
किश्त की राशि ठेकेदारों को दी, फिर भी मकान अधूरा
ग्राम बेहराडीह के हितग्राही बालमती नेताम, कंसिंग नेताम, फूलबती नेताम, रमेश नेताम, शांति नेताम, सरवन नेताम और लच्छी नेताम ने बताया कि उनके आवास वर्ष 2021-22 में स्वीकृत हुए थे। निर्माण सामग्री जुटाने और अन्य परेशानियों से बचने के लिए उन्होंने मकान बनाने की जिम्मेदारी निजी ठेकेदारों को सौंप दी थी।
हितग्राहियों के अनुसार, उन्होंने अपने बैंक खातों से आवास की किश्त की राशि निकालकर ठेकेदारों को दे दी। शुरुआत में निर्माण कार्य कराया गया, लेकिन बाद में ठेकेदारों ने काम बीच में ही बंद कर दिया। इसके बाद से मकानों का निर्माण आगे नहीं बढ़ा। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी स्थिति केवल बेहराडीह तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्लॉक के अन्य गांवों में भी कई आवास अधूरे पड़े हैं।
सीईओ के एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी बेअसर?
आवास निर्माण में लापरवाही को लेकर हाल ही में जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने मैनपुर जनपद पंचायत कार्यालय के सभा भवन में पंचायत सचिवों और रोजगार सहायकों की बैठक ली थी। बैठक में उन्होंने अधूरे आवासों को जल्द पूरा कराने के निर्देश दिए थे।
इसके साथ ही जिन ठेकेदारों ने हितग्राहियों से आवास निर्माण की राशि लेकर काम अधूरा छोड़ दिया है, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए थे।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि इन निर्देशों के करीब 15 दिन बीत जाने के बाद भी हितग्राहियों के अनुसार स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। न तो संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है और न ही अधूरे आवासों का निर्माण दोबारा शुरू हुआ है।
सरकारी योजना का लाभ पाने के बाद भी पक्की छत का इंतजार
कमार समुदाय विशेष पिछड़ी जनजाति में शामिल है। ऐसे परिवारों के लिए आवास योजना केवल सरकारी सहायता नहीं, बल्कि सुरक्षित जीवन और सम्मान से जुड़ी जरूरत है। इसके बावजूद वर्षों पहले स्वीकृत आवास अधूरे पड़े रहना व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
अब सवाल यह है कि हितग्राहियों के खाते से निकाली गई आवास की राशि की जिम्मेदारी किसकी है? ठेकेदारों से राशि की वसूली कब होगी? और आखिर कब इन कमार परिवारों को पक्के मकान की छत नसीब होगी?




