1100 से ज्यादा पेड़ों पर गडलिंग के निशान और ताजा कटे ठूंठ मिले; ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों में 2017 के बाद वन क्षेत्र घटने के संकेत, जांच के दौरान वन टीम का ग्रामीणों से विवाद
गरियाबंद। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के करका क्षेत्र में जंगल कटाई और वनभूमि पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। वन विभाग के प्रारंभिक आकलन के मुताबिक 2016 से 2026 के बीच क्षेत्र में करीब 30 हजार पेड़-पौधे हटाए गए हैं। वहीं वर्तमान GPS आधारित आकलन में करीब 35 हेक्टेयर वनभूमि पर अतिक्रमण के संकेत मिले हैं। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया है कि अतिक्रमण की अंतिम सीमा DGPS आधारित ड्रोन मैपिंग पूरी होने के बाद तय होगी।
22 सितंबर को वन विभाग की टीम ने करका क्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान 1100 से अधिक पेड़ों पर गडलिंग यानी पेड़ों की छाल को चारों ओर से हटाने के निशान और बड़ी संख्या में ताजा कटे पेड़ों के ठूंठ मिलने की बात सामने आई। अतिक्रमण की वास्तविक सीमा और वनक्षति का वैज्ञानिक आकलन करने के लिए GPS, DGPS, ड्रोन इमेजरी और अन्य डिजिटल साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
2006 में घना जंगल, 2017 के बाद बदलाव के संकेत
वन विभाग ने करका क्षेत्र की पुरानी स्थिति जानने के लिए ISRO की सैटेलाइट इमेजरी का भी अध्ययन किया है। विभाग के अनुसार 2006 और 2012 की तस्वीरों में क्षेत्र में घना वन दिखाई देता है, जबकि करीब 2017 से वन क्षेत्र के धीरे-धीरे खुले क्षेत्र में बदलने के संकेत मिले। बाद की सैटेलाइट तस्वीरों में भी वन क्षरण जारी रहने की बात कही गई है। इसी सैटेलाइट विश्लेषण और मैदानी सत्यापन के आधार पर पेड़ों की कटाई का प्रारंभिक अनुमान लगाया गया है।
हालांकि 30 हजार पेड़ों का आंकड़ा अंतिम गणना नहीं है। विभाग ने इसे प्रारंभिक अनुमान बताया है और विस्तृत DGPS ड्रोन मैपिंग के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की बात कही है। यही बात स्वतंत्र समाचार रिपोर्टों में भी सामने आई है।
मुआवजा लेकर विस्थापित हुआ था करका गांव
करका पहले एक वन ग्राम था और सोंढूर बांध के कैचमेंट क्षेत्र में स्थित था। बांध निर्माण के बाद 1980 के दशक में गांव का विस्थापन किया गया था। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार करका के 55 लोगों को जल संसाधन विभाग की ओर से मुआवजा दिया गया था।
विभाग का कहना है कि इसके बावजूद बाद में ऊंचाई वाले वन क्षेत्र में दोबारा अतिक्रमण और वन कटाई की गतिविधियां सामने आईं।
2016 में भी दर्ज हुआ था वन अपराध का मामला
करका से जुड़े 22 लोगों के खिलाफ वर्ष 2016 में POR क्रमांक 7922 के तहत करीब 22 हेक्टेयर घने वन क्षेत्र में कथित अतिक्रमण को लेकर मामला दर्ज किया गया था। विभागीय प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 2023 में नगरी न्यायालय ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था।
इसके बाद भी वन विभाग का कहना है कि क्षेत्र के कुछ हिस्सों में अतिक्रमण जारी रहा और उसका विस्तार हुआ।
जांच करने पहुंची वन टीम को ग्रामीणों ने रोका
22 सितंबर को USTR के उप संचालक के नेतृत्व में करीब 20 से 25 वन अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम करका के कथित अतिक्रमित क्षेत्र में निरीक्षण कर रही थी। विभाग के अनुसार इस दौरान करका निवासी मुकेश मरकाम से कथित अतिक्रमित वनभूमि में की जा रही खेती को लेकर पूछताछ की गई।
विभाग की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जब टीम उसके बताए गए क्षेत्र की ओर आगे बढ़ी तो करीब 50 से 60 लोगों ने सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने का प्रयास किया और मुकेश मरकाम को मौके से ले गए। पूरी घटना की वीडियोग्राफी किए जाने की बात विभाग ने कही है।
इसके बाद 23 सितंबर को POR क्रमांक 20/17 मुकेश मरकाम, केशनाथ उर्फ गोलू और अन्य के खिलाफ दर्ज किया गया। विभाग ने मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की बात कही है।
एक स्थानीय समाचार रिपोर्ट के अनुसार इस घटना के संबंध में खल्लारी थाने में वीडियो साक्ष्य के साथ FIR के लिए आवेदन देने की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी।
जंगल कटने से हाथी कॉरिडोर पर असर का खतरा
करका का क्षेत्र केवल सामान्य वनभूमि नहीं है। विभाग के अनुसार यह महत्वपूर्ण वन्यजीव आवास और हाथियों के आवागमन वाले परिदृश्य का हिस्सा है।
वन क्षेत्र में लगातार कटाई, पेड़ों की गडलिंग और वनभूमि को कृषि क्षेत्र में बदलने से वन्यजीवों के आवास का विखंडन हो सकता है और उनके पारंपरिक आवागमन मार्ग प्रभावित हो सकते हैं। इससे आसपास के गांवों में मानव-हाथी और अन्य मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना बढ़ने की चिंता विभाग ने जताई है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की आधिकारिक वेबसाइट भी रिजर्व को जैव विविधता से समृद्ध क्षेत्र बताती है और इसके मिशन में वैज्ञानिक अध्ययन व समुदायों के साथ मिलकर वन्यजीव संरक्षण को शामिल करती है।
65% फील्ड स्टाफ के पद खाली, फिर भी 1050 हेक्टेयर मुक्त कराने का दावा
USTR प्रशासन के अनुसार रिजर्व में करीब 65% फील्ड स्टाफ के पद खाली हैं। इसके अलावा पिछले चार वर्षों में वन एवं वन्यजीव संरक्षण कार्य में तैनात टीमों पर पांच गंभीर हमले होने की जानकारी दी गई है।
इसके बावजूद USTR प्रशासन का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में करीब 1,050 हेक्टेयर अतिक्रमित वन क्षेत्र मुक्त कराया गया है। इसके लिए ड्रोन आधारित निगरानी, ISRO सैटेलाइट इमेजरी, GPS/DGPS मैपिंग, डिजिटल साक्ष्य और दस्तावेजी प्रमाणों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
हाल में USTR के सीतानदी कोर रेंज में भी करीब 106 हेक्टेयर वनभूमि अतिक्रमण मुक्त कराने और 166 आरोपियों को चिन्हित करने की रिपोर्ट सामने आई थी, जिससे रिजर्व में अतिक्रमण के खिलाफ चल रही कार्रवाई का व्यापक संदर्भ सामने आता है।
अब जांच में इन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे
30 हजार पेड़ कब और कैसे कटे?
35 हेक्टेयर वनभूमि पर अतिक्रमण कितना पुराना है?
2017 के बाद वन क्षेत्र में बदलाव किन गतिविधियों से हुआ?
क्या सैटेलाइट और ड्रोन मैपिंग से कटाई की वास्तविक सीमा स्पष्ट हो पाएगी?
क्या पहले से मुआवजा पाने वाले विस्थापित परिवारों की भूमिका रही है?
और सबसे बड़ा सवाल—हाथी कॉरिडोर और वन्यजीव आवास के बीच इतने बड़े पैमाने पर वनक्षति आखिर कितने समय तक जारी रही?
फिलहाल करका क्षेत्र में GPS/DGPS मैपिंग, सैटेलाइट इमेजरी और मैदानी साक्ष्यों के आधार पर जांच जारी है। इसलिए 30 हजार पेड़ों और 35 हेक्टेयर अतिक्रमण के आंकड़े को अंतिम निष्कर्ष नहीं, बल्कि वन विभाग का प्रारंभिक आकलन माना जाना चाहिए। अंतिम तस्वीर विस्तृत मैपिंग और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।





