बच्चों ने सुआ, गेड़ी और करमा नृत्य से बांधा समां, कृषि औजारों की पूजा के बाद किया पौधरोपण; तीन प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने दिखाया हुनर
मैनपुर। ब्लॉक मुख्यालय से करीब 4 किलोमीटर दूर स्थित डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल देहारगुड़ा में मंगलवार को विश्व आदिवासी दिवस और छत्तीसगढ़ के प्रमुख कृषि पर्व हरेली का उत्सव पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा और चित्रकला के माध्यम से छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आदिवासी परंपराओं की झलक प्रस्तुत की।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए नृत्य, फैंसी ड्रेस और चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों ने भी पारंपरिक वेशभूषा धारण कर आयोजन को खास बनाया।
सुआ, गेड़ी और करमा नृत्य ने जीता दिल
नृत्य प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने सुआ, गेड़ी, करमा सहित विभिन्न आदिवासी लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी। आकांक्षा साहू ने प्रथम स्थान हासिल किया। वैभवी ग्रुप दूसरे और नेहल ग्रुप तीसरे स्थान पर रहा।
फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता में बच्चों ने आदिवासी समाज, किसान, प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े किरदारों और संदेशों को अपनी वेशभूषा के माध्यम से प्रस्तुत किया। अलग-अलग वर्गों में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा दिखाई।
चित्रों में उकेरी संस्कृति और प्रकृति
चित्रकला प्रतियोगिता में भी विद्यार्थियों ने उत्साह दिखाया। बालक वर्ग में रजत राज प्रथम, नवाज मेमन द्वितीय और हिमांशु साहू तृतीय रहे। बालिका वर्ग में निकिता प्रधान ने प्रथम, आरूषि नवरत्न ने द्वितीय और अदिति पटेल ने तृतीय स्थान हासिल किया।
कृषि औजारों की पूजा, फिर किया पौधरोपण
हरेली उत्सव के तहत विद्यार्थियों ने कुदाल, फावड़ा और हंसिया जैसे कृषि औजारों की पूजा की। छोटे बच्चों ने मिट्टी के खिलौनों और नीम की टहनियों से घर-आंगन सजाकर हरेली पर्व की परंपरा को समझा।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए विद्यालय परिसर में शिक्षकों और विद्यार्थियों ने मिलकर पौधरोपण भी किया। इस दौरान बच्चों को पेड़-पौधों के संरक्षण और प्रकृति के महत्व की जानकारी दी गई।
‘आदिवासी समाज हमारी संस्कृति की जड़’
विद्यालय के संस्था प्रमुख अजय नागेश ने कहा कि आदिवासी समाज हमारी संस्कृति की जड़ है। विश्व आदिवासी दिवस और हरेली जैसे पर्व बच्चों को प्रकृति, कृषि और अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं। प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों में संस्कृति के प्रति गर्व के साथ रचनात्मकता विकसित होती है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। इस अवसर पर लेखराज साहू, राकेश साहू, छत्तर ध्रुव, उत्तम साहू, सौरभ यादव, गरिमा ठाकुर, गीता सोनवानी, कोनिका साहू, गिरधर पटेल, दुष्यंत साहू, रमेश यदु, प्रियंका कौशिक, दुर्गा साहू, ज्योति कश्यप, देविका नेताम, नगमा खातून, चन्द्रध्वज बीसी, प्रहलाद मरकाम, शैलेश यादव और लक्ष्मी बघेल सहित बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे।



