गरियाबंद | पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने और शिल्पियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, गरियाबंद में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), भारत सरकार, वस्त्र मंत्रालय की ‘सीएचसीडीएस योजना’ के तहत छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में शिल्पियों को औजार और उपकरण खरीदने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत शामिल हुईं। उन्होंने गरियाबंद जिले के 33 हितग्राही शिल्पियों को औजार एवं उपकरण क्रय करने के लिए स्वीकृत राशि के चेक वितरित किए। इसी के साथ, अन्य जिलों से आए 20 हितग्राहियों को उपकरण टूल्स किट भी बांटे गए।
शिल्पियों से सीधा संवाद और उनकी मांगें इस अवसर पर अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत ने उपस्थित शिल्पियों से सीधा संवाद कर उनकी ज़मीनी समस्याओं और जरूरतों को समझा। बातचीत के दौरान गरियाबंद जिले के शिल्पियों ने बांस शिल्प परियोजना, डोंगरीगांव तक आवागमन को सुगम बनाने के लिए पारागांव-डोंगरीगांव मार्ग के पक्कीकरण की प्रमुखता से मांग रखी। वहीं, धमतरी जिले से आए शिल्पियों ने अपने कार्य को विस्तार देने के लिए कार्यशाला भवन के निर्माण और जूट शिल्प प्रशिक्षण की व्यवस्था करने का आग्रह किया।
शिल्पियों को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य श्रीमती राजपूत ने शिल्पियों को संबोधित करते हुए उन्हें प्राप्त राशि का सदुपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने शिल्पियों को आवश्यक औजार-उपकरण खरीदकर अपने उत्पादन और जॉबवर्क की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि शासन की योजनाओं का मुख्य उद्देश्य सिर्फ पारंपरिक हस्तशिल्प को जीवित रखना नहीं है, बल्कि शिल्पियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना भी है।
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में मुख्य महाप्रबंधक श्री एस.एल. धुर्वे, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड के पूर्व प्रबंधक श्री एच.बी. अंसारी, जिले के सहायक प्रबंधक श्री रामवृक्ष नेताम सहित बड़ी संख्या में स्थानीय शिल्पी, बोर्ड के अधिकारी और वरिष्ठ जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।





