गरियाबंद | उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में अवैध लकड़ी तस्करी और वन्यजीव शिकार के खिलाफ चल रही कार्रवाई का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। लगातार दबिश और कानूनी कार्रवाई के बाद ग्राम साहेबिनकछार के छह आरोपियों ने वन विभाग के सामने सरेंडर कर दिया। ये सभी सागौन की तस्करी और वन्यजीव शिकार से जुड़े मामलों में आरोपी हैं।

वन विभाग के अनुसार, 9 जून 2026 को साहेबिनकछार गांव में सर्च वारंट के आधार पर कई घरों और बाड़ियों की तलाशी ली गई थी। इस दौरान बड़ी मात्रा में सागौन, साल और बीजा की लकड़ी, स्लीपर, लट्ठे, आरा, धनुष-तीर, फंदे तथा वन्यजीवों के अवशेष बरामद किए गए। इसके बाद सभी आरोपियों के खिलाफ अलग-अलग वन अपराध प्रकरण दर्ज किए गए।
जांच के दौरान वन विभाग ने छह आरोपियों के कब्जे से अवैध लकड़ी के साथ शिकार में इस्तेमाल होने वाले उपकरण भी जब्त किए। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर उनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 तथा छत्तीसगढ़ काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम, 1984 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई।
वन विभाग ने बताया कि तीन आरोपियों को 15 जून को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया था, जबकि शेष तीन आरोपियों को 22 जून को गिरफ्तार कर अगले दिन न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। कार्रवाई के दौरान जब्त सामग्री और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
अधिकारियों का कहना है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में अवैध कटाई और वन्यजीव शिकार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वन संपदा और जैव विविधता की सुरक्षा के लिए नियमित निगरानी, विशेष अभियान और सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण संरक्षित वन क्षेत्र है, जहां वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है।





