राधे पटेल / गरियाबंद मैनपुर/गरियाबंद/देवभोग।
मैनपुर, गरियाबंद तथा देवभोग क्षेत्र में स्थित विश्राम गृह की मरम्मत को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। वर्ष 2025–26 में लगभग 15 लाख रुपये की राशि से विश्राम गृह की रिपेयरिंग कराई जा रही है। बताया जा रहा है कि यह कार्य लोक निर्माण विभाग (PWD) के द्वारा कराया जा रहा है, जिस पर मनमाने तरीके से कार्य कराने के आरोप भी लग रहे हैं।
जानकारी के अनुसार हर 5 वर्ष में लगभग इसी राशि से भवन की मरम्मत कराई जाती रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस राशि से बार-बार मरम्मत कराई जा रही है, उतनी ही राशि को जोड़कर एक नया भवन भी बनाया जा सकता है। वर्तमान भवन में कुछ स्थानों पर दरारें जरूर दिखाई देती हैं, लेकिन वह इतनी अधिक जर्जर नहीं बताई जा रही हैं कि हर कुछ वर्षों में भारी-भरकम राशि खर्च कर मरम्मत करानी पड़े।
आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि भवन की दीवारों पर ऊपरी तौर पर प्लास्टर और रंग-रोगन कर काम को पूरा दिखा दिया जाता है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इस तरह की मरम्मत के बाद अगले वर्षों में फिर से उसी प्रकार की राशि की मांग की जाती है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2019–20 में भी भवन सुधार के नाम पर भारी राशि स्वीकृत की गई थी। इसके बावजूद कुछ ही वर्षों बाद 2025–26 में दोबारा मरम्मत की आवश्यकता पड़ना कई सवाल खड़े करता है। यह विश्राम गृह क्षेत्र में आने वाले कई नेताओं और अधिकारियों के ठहरने का प्रमुख स्थान माना जाता है, जहां लगभग रोजाना आवागमन बना रहता है।
ऐसे में लगातार मरम्मत पर खर्च करना और जर्जर भवन को केवल रिपेयरिंग के सहारे चलाना क्या उचित है, इस पर स्थानीय नागरिकों के बीच चर्चा तेज हो गई है। लोगों का मानना है कि यदि बार-बार मरम्मत पर खर्च करने के बजाय एक बार नया भवन निर्माण कर दिया जाए, तो लंबे समय तक बेहतर सुविधा उपलब्ध हो सकती है और सरकारी धन का भी अधिक सार्थक उपयोग होगा।
वहीं, क्षेत्र के कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि लोक निर्माण विभाग द्वारा यह कार्य मनमाने तरीके से कराया जा रहा है, जिसमें पारदर्शिता और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस विषय पर क्या निर्णय लेता है—क्या भविष्य में फिर से मरम्मत की प्रक्रिया जारी रहेगी या फिर क्षेत्र की जरूरत को देखते हुए नया विश्राम गृह भवन बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाया जाएगा।


