बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के न्यायधानी क्षेत्र में शुक्रवार को उस वक्त दहशत फैल गई, जब प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर बर्ड फ्लू (H5N1) के फैलने की पुष्टि की। बिलासपुर के एक बड़े पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों की रहस्यमयी और सामूहिक मौत के बाद आई लैब रिपोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन मंत्रालय की नींद उड़ा दी है। संक्रमण को ‘सुपर-स्प्रेडर’ बनने से रोकने के लिए प्रशासन ने अगले 48 घंटों के भीतर 5,000 से अधिक पक्षियों को वैज्ञानिक तरीके से मारने (Culling) का ‘डेथ वारंट’ जारी कर दिया है।
भोपाल लैब की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
बीते एक हफ्ते से जिले के सकरी और कोटा क्षेत्र के बीच स्थित एक निजी पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों के मरने का सिलसिला शुरू हुआ था। स्थानीय पशु चिकित्सकों ने पहले इसे रानीखेत बीमारी समझा, लेकिन जब एक ही दिन में 400 से अधिक मुर्गियां मरीं, तो प्रशासन ने सैंपल ‘हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज लैब’ (NIHSAD), भोपाल भेजे। शुक्रवार सुबह आई रिपोर्ट में घातक H5N1 एवियन इन्फ्लुएंजा की पुष्टि हुई है।
प्रशासनिक घेराबंदी: 1 KM का ‘किल ज़ोन’ और 10 KM का ‘सर्विलांस’
कलेक्टर ने आपातकालीन बैठक बुलाकर पूरे क्षेत्र को छावनी में तब्दील करने का निर्देश दिया है।
किल ज़ोन (Kill Zone): संक्रमण के केंद्र (Epicenter) से 1 किलोमीटर के दायरे में आने वाले हर पक्षी—चाहे वह पालतू हो या जंगली—को मारकर गहरे गड्ढों में दफनाया जाएगा। इसके लिए 15 विशेष ‘रिस्पॉन्स टीमें’ तैनात की गई हैं।
बिक्री पर बैन: बिलासपुर शहर और आस-पास के 10 किलोमीटर के दायरे में चिकन, अंडे और बत्तख के मांस की बिक्री पर अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगा दिया गया है।
चेक पोस्ट: जिले की सीमाओं पर चेक पोस्ट बनाए गए हैं ताकि बाहरी जिलों से आने-जाने वाली पोल्ट्री गाड़ियों की सघन जांच की जा सके।
क्या इंसानों को है खतरा? (The Human Factor)
विशेषज्ञों के अनुसार, H5N1 वायरस का म्यूटेशन इंसानों के लिए भी घातक साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक ने ‘टाइम्स’ को बताया, “फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी अनिवार्य है। हमने उन सभी कर्मचारियों को आइसोलेशन में रखा है जो संक्रमित फार्म के संपर्क में थे। उनके ब्लड सैंपल भी जांच के लिए भेजे गए हैं।”
पोल्ट्री कारोबारियों पर ‘आर्थिक बिजली’
बर्ड फ्लू की खबर ने छत्तीसगढ़ के पोल्ट्री बाजार को हिला कर रख दिया है। व्यापारियों का अनुमान है कि इस प्रतिबंध और डर के कारण अगले एक हफ्ते में करोड़ों रुपये का टर्नओवर प्रभावित होगा। हालांकि, सरकार ने ‘कलिंग’ (Culling) के बदले पोल्ट्री संचालकों को प्रति पक्षी निर्धारित मुआवजा देने का भरोसा दिलाया है।
एक्सपर्ट एडवाइजरी: क्या खाएं, क्या नहीं?
70 डिग्री का नियम: WHO के अनुसार, यदि चिकन या अंडे को 70°C से ऊपर के तापमान पर अच्छी तरह पकाया जाए, तो वायरस मर जाता है। हालांकि, मौजूदा स्थिति में कच्चे मांस को छूने से बचना ही समझदारी है।
पक्षियों की मौत: यदि आपके आंगन या घर के आसपास कौवे या प्रवासी पक्षी मृत मिलते हैं, तो उन्हें न छुएं। तुरंत हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें।



