विनोद चंद्राकर का आरोप- समय पर राशन नहीं पहुंचना प्रशासनिक विफलता; महासमुंद के कई गांवों में हितग्राहियों के खाली हाथ लौटने का दावा
महासमुंद। छत्तीसगढ़ में सितंबर माह का राशन वितरण पूरा होने से पहले ही बड़ी संख्या में राशन कार्डधारियों तक चावल नहीं पहुंचने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व संसदीय सचिव एवं महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर ने राशन वितरण की स्थिति को लेकर राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं।
चंद्राकर ने आरोप लगाया कि सितंबर 2026 के अंतिम दिनों तक प्रदेश के करीब 25.45 लाख राशन कार्डधारी परिवारों को चावल नहीं मिल पाया, जो उनके अनुसार सार्वजनिक वितरण प्रणाली की गंभीर प्रशासनिक समस्या को दर्शाता है।
हालांकि, सरकारी PDS पोर्टल पर 24 सितंबर तक सितंबर माह का वितरण जारी बताया गया था। पोर्टल पर 83,31,947 राशन कार्डों में 57,43,934 कार्डों द्वारा खाद्यान्न प्राप्त करने और 68.94 प्रतिशत मासिक ट्रांजैक्शन का आंकड़ा दर्ज था।
दो माह का राशन देने के आदेश के बीच वितरण पर सवाल
राज्य सरकार ने सितंबर और अक्टूबर 2026 का खाद्यान्न एक साथ वितरित करने की व्यवस्था की थी। खाद्य विभाग से जुड़ी जानकारी के अनुसार राज्य की 14,186 उचित मूल्य दुकानों को दोनों महीनों का खाद्यान्न आवंटित किया गया था और 30 सितंबर तक वितरण पूरा करने के निर्देश दिए गए थे।
इसी व्यवस्था के बीच 25 सितंबर की एक रिपोर्ट में बताया गया कि प्रदेश के 83,31,947 राशन कार्डों में से करीब 69.46 प्रतिशत कार्डों पर ही वितरण हुआ था और लगभग 25.45 लाख कार्डधारी परिवार उस समय तक चावल से वंचित थे।
चंद्राकर का कहना है कि सरकार द्वारा दो महीने का राशन एक साथ देने की बात कही जा रही है, लेकिन यदि सितंबर का राशन ही समय पर हितग्राहियों तक नहीं पहुंच रहा है तो योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
महासमुंद के गांवों का भी किया उल्लेख
विनोद चंद्राकर ने महासमुंद जिले के अछोली, मचेवा, मानपुर सहित कई गांवों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि वहां राशन नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। उनके अनुसार कुछ हितग्राहियों को उचित मूल्य की दुकानों से खाली हाथ लौटना पड़ा।
इन स्थानीय दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है। इसलिए संबंधित राशन दुकानों और खाद्य विभाग का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा।
चावल के साथ शक्कर की उपलब्धता पर भी सवाल
पूर्व विधायक ने केवल चावल ही नहीं, बल्कि राशन दुकानों में शक्कर की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाया। उनका आरोप है कि कई दुकानों में लंबे समय से शक्कर उपलब्ध नहीं होने के कारण गरीब परिवारों को बाजार से अधिक कीमत पर शक्कर खरीदनी पड़ रही है।
यदि किसी दुकान में निर्धारित खाद्यान्न या शक्कर उपलब्ध नहीं है, तो इसकी वास्तविक स्थिति संबंधित दुकान के स्टॉक रजिस्टर और विभागीय रिकॉर्ड से स्पष्ट की जा सकती है।
सरकार से समय-सीमा बढ़ाने और पर्याप्त स्टॉक की मांग
चंद्राकर ने राज्य सरकार से मांग की कि राशन वितरण की समय-सीमा बढ़ाई जाए और जिन परिवारों को निर्धारित अवधि में राशन नहीं मिला है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने उचित मूल्य की दुकानों में पर्याप्त मात्रा में चावल और अन्य आवश्यक खाद्यान्न उपलब्ध कराने तथा भविष्य में वितरण व्यवस्था में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं आने देने की मांग की।
सरकारी आंकड़े और राजनीतिक आरोप—दोनों पर नजर
राशन वितरण को लेकर सामने आए आंकड़ों में एक तरफ सरकारी पोर्टल पर वितरण जारी रहने की जानकारी है, जबकि दूसरी तरफ विपक्षी नेता विनोद चंद्राकर ने बड़ी संख्या में परिवारों को राशन नहीं मिलने का मुद्दा उठाया है। खाद्य विभाग ने 25 सितंबर को यह भी बताया था कि सितंबर माह के लिए आवंटित खाद्यान्न का सभी उचित मूल्य दुकानों में भंडारण पूरा हो चुका है और वितरण जारी है।
ऐसे में अंतिम तस्वीर 30 सितंबर की निर्धारित वितरण समय-सीमा पूरी होने के बाद अधिक स्पष्ट होगी। फिलहाल मुद्दा यह है कि शेष पात्र परिवारों तक खाद्यान्न समय पर पहुंचता है या नहीं और जिन दुकानों में वितरण प्रभावित होने की शिकायतें हैं, वहां प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।



