दुर्गम पहाड़ी इलाका आमामोरा में जल संकट से ग्रामीणों में चिंता

गरियाबंद । जिले के आमामोरा पंचायत इलाके में जल संकट गहराने से ग्रामीणों को चिंता सताने लगी है । यह क्षेत्र जो पहाड़ी, दुर्गम और दूरस्थ इलाका है, साथ ही उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के पास स्थित है। यहां के ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीण झरने (झरिया) सूखने लगे है बरसात के बाद भी कई प्राकृतिक झरने सूख जाते हैं, जिससे पानी की उपलब्धता बहुत कम हो जाती है।
हैंडपंपों में आयरन युक्त पानी आता है आमामोरा और आसपास की ओड़ पंचायत में 20 से अधिक हैंडपंप हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर में लाल रंग का आयरन युक्त पानी निकलता है, जो पीने योग्य नहीं होता।
दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है लगभग 700 परिवारों को चट्टानों या झरनों से रिसते पानी पर निर्भर रहना पड़ता है, जो कई किलोमीटर दूर होता है। महिलाओं और बच्चों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। क्षेत्र आदिवासी बहुल है और पहाड़ी होने से भूजल स्तर कम है, साथ ही कुछ जगहों पर फ्लोराइड की भी समस्या बनी हुई है, हाल की स्थिति 2024-2025 के आधार पर आमामोरा-ओड़ पंचायत में यह समस्या चरम पर है,
जहां ग्रामीणों की परेशानी बना है ,झरिया सूखने से पेयजल की भारी कमी है चूंकि क्षेत्र अब नक्सल मुक्त हो चुका है, लेकिन पानी जैसी बुनियादी सुविधा अभी भी नहीं पहुंच पाई है। छत्तीसगढ़ सरकार की जल जीवन मिशन और अन्य योजनाओं के तहत पाइपलाइन या अन्य समाधान पर काम चल रहा है, लेकिन दुर्गम इलाकों में अभी पूरी तरह लागू होना बाकी है। यह समस्या कई पहाड़ी आदिवासी इलाकों में जहां बुनियादी ढांचा पहुंचाना चुनौतीपूर्ण होता चला जा रहा है।




