कवर्धा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत कबीरधाम जिले में ग्रामीणों को बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों में वर्तमान में 2588 निर्माण कार्य प्रगतिरत हैं, जिनके माध्यम से 68 हजार 970 से अधिक पंजीकृत ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है। रोजगार उपलब्ध कराने के मामले में कबीरधाम जिला प्रदेश में लगातार अग्रणी बना हुआ है।
चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में जनपद पंचायत बोड़ला, कवर्धा, पंडरिया और सहसपुर लोहारा क्षेत्र के ग्रामीणों को अब तक 9 लाख 36 हजार मानव दिवस का रोजगार प्राप्त हो चुका है। इन कार्यों के लिए ग्रामीणों को प्रतिदिन 261 रुपए मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।
जिले की ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों की मांग के अनुसार विभिन्न निर्माण कार्य शुरू किए गए हैं। इनमें “नवा तरिया आय के जरिया”, आजीविका डबरी, सामुदायिक डबरी, नए तालाबों का निर्माण, अमृत सरोवर, सोखता गड्ढा निर्माण तथा पुराने तालाबों के गहरीकरण जैसे जल संरक्षण एवं जल संवर्धन कार्य शामिल हैं। इन कार्यों से जहां ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है, वहीं स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण होने से आजीविका के नए अवसर भी विकसित हो रहे हैं।
गोपाल वर्मा ने बताया कि जिले के सभी ग्राम पंचायतों में पर्याप्त मात्रा में कार्य स्वीकृत हैं और ग्रामीणों की मांग पर तत्काल नए कार्य खोले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी जनपद पंचायतों के सीईओ को अधिक से अधिक ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन की प्राथमिकता है कि वर्षा ऋतु से पहले जल संग्रहण से जुड़े कार्यों को पूरा कर लिया जाए, ताकि भू-जल स्तर को बेहतर बनाने में मदद मिल सके।
वहीं अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि वर्तमान में 2580 से अधिक निर्माण कार्य जारी हैं और इनमें प्रतिदिन हजारों ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4742 हितग्राहियों को अपने स्वयं के आवास निर्माण में रोजगार प्राप्त हो रहा है। उन्होंने बताया कि 1 अप्रैल से अब तक जिले के ग्रामीणों को 21 करोड़ रुपए से अधिक मजदूरी भुगतान किया जा चुका है।
जिले में जल संरक्षण के लिए सोखता गड्ढा निर्माण अभियान भी तेज गति से चलाया जा रहा है। मैदानी और वनांचल क्षेत्रों में ग्रामीणों को रोजगार के साथ-साथ जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। ग्रामीण भी स्वयं आगे आकर इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।



