राधे पटेल / गरियाबंद गरियाबंद जिले के अंतर्गत ग्राम अमलीपदर नावापारा में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम में एक ओर जहां प्रशासन अपनी योजनाओं और त्वरित समाधान की उपलब्धियां गिना रहा था, वहीं दूसरी ओर कार्यक्रम स्थल पर बड़ी संख्या में खाली पड़ी कुर्सियां कई सवाल खड़े करती नजर आईं।

ग्रामीणों का कहना था कि उन्हें यह तक जानकारी नहीं थी कि सुशासन तिहार का आयोजन कब और कहां किया जा रहा है। कार्यक्रम स्थल पर अपेक्षित भीड़ नहीं पहुंचने से प्रशासन के प्रचार-प्रसार व्यवस्था पर सवाल उठने लगे।
कार्यक्रम में जिले के कलेक्टर बी.एस. उइके, एसपी निखिल चंद्राकर, वन विभाग के एसडीओ मनोज चंद्राकर, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप, जनपद पंचायत अध्यक्ष मोहना नेताम , उपाध्यक्ष नन्दकुमारी तपेश्वर ठाकुर, जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम सहित कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

शिविर के दौरान ग्रामीणों से कुल 812 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से प्रशासन द्वारा 482 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण किए जाने का दावा किया गया। आवेदन राशन कार्ड, पेंशन, राजस्व, बिजली, पानी और अन्य जनसमस्याओं से संबंधित बताए गए।

कार्यक्रम के दौरान पूर्व संसदीय सचिव एवं विधायक Govardhan Singh Manjhi ने जिला प्रशासन पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि जिले के कई अधिकारी फोन तक नहीं उठाते और न ही जनप्रतिनिधियों को जवाब देते हैं। उन्होंने मंच से कहा कि, “जब अधिकारी हमारी बातें नहीं सुनते, तो आम जनता की आवाज कहां से सुनेंगे।”
वहीं कांग्रेस नेता Sanjay Netam ने भी सुशासन तिहार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि शिविरों में आम जनता से आवेदन तो ले लिए जाते हैं, लेकिन बाद में संबंधित विभागों तक उन आवेदनों पर सही कार्रवाई नहीं पहुंचती। कई मामलों में बिना समाधान के ही आवेदन को “निराकृत” बता दिया जाता है।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाया जा रहा सुशासन तिहार 2026 अभियान जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान और प्रशासन को गांव स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। सरकार का दावा है कि शिविरों के माध्यम से मौके पर समस्याओं का समाधान किया जा रहा है।


