क्रेडा ने दी सौर संयंत्रों की कार्यशीलता की जानकारी, जिले के 38 गांवों में 107 संयंत्र स्थापित; बैटरियों के बैकअप और बिजली के निर्धारित उपयोग पर जोर
गरियाबंद। जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में बिजली की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सौर ऊर्जा महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के वनांचल क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) द्वारा स्थापित सौर ऊर्जा संयंत्रों के जरिए 3,907 परिवारों को बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। विभाग के अनुसार, जिले के 38 गांवों में कुल 107 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिनकी कुल क्षमता 513 किलोवाट है। इनसे ग्रामीण परिवारों को विशेष रूप से रात के समय प्रकाश की सुविधा मिल रही है।
ग्राम तौरेंगा में सौर विद्युतीकरण व्यवस्था को लेकर प्रकाशित समाचार के बाद क्रेडा ने संयंत्रों की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी है। विभाग का कहना है कि गांव में पुराने सोलर पैनलों को बदलकर संबंधित संयंत्र को दोबारा चालू कर दिया गया है। साथ ही, अन्य संयंत्रों के रखरखाव और तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
तौरेंगा में 147 परिवारों को सौर बिजली कनेक्शन
विकासखंड मैनपुर के ग्राम तौरेंगा में क्रेडा ने सौर विद्युतीकरण योजना के तहत वर्ष 2007-08 और 2017-18 में कुल 20 किलोवाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए थे। इनके माध्यम से गांव के 147 परिवारों को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा गांव में 10 सौर पथ प्रकाश भी लगाए गए हैं।
विभाग के मुताबिक, वर्ष 2007-08 में स्थापित संयंत्र के सोलर मॉड्यूल काफी पुराने हो जाने के कारण बिजली उत्पादन की क्षमता घट गई थी। समस्या के निराकरण के लिए क्रेडा मुख्यालय से स्वीकृति मिलने के बाद पुराने पैनलों को बदल दिया गया है और संबंधित संयंत्र को फिर से कार्यशील कर दिया गया है।
बैटरियों की खराबी से प्रभावित हो रहा बिजली बैकअप
क्रेडा ने बताया कि वर्ष 2016-17 में स्थापित दो सौर संयंत्रों की बैटरियों में आंशिक खराबी आने से उनकी कार्यशीलता प्रभावित हुई है। विभाग इन संयंत्रों के रखरखाव और सुधार के लिए आवश्यक पहल कर रहा है।
विभाग के अनुसार, सौर संयंत्रों में दिन के समय संचित होने वाली ऊर्जा का उपयोग मुख्य रूप से रात में प्रकाश व्यवस्था के लिए किया जाना चाहिए। लेकिन कुछ ग्रामीण दिन में ही मोबाइल फोन चार्ज करने, चार्जिंग बल्ब और अन्य उपकरणों को जोड़कर बिजली का उपयोग करते हैं। इससे बैटरियों में संचित ऊर्जा कम हो जाती है और रात में बिजली मिलने की अवधि प्रभावित हो सकती है।
क्रेडा ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे निर्धारित तरीके से सौर ऊर्जा का उपयोग करें और दिन में अनावश्यक उपकरणों को कनेक्शन से जोड़ने से बचें, ताकि रात के समय पर्याप्त बैकअप उपलब्ध रह सके।
संयंत्रों का रखरखाव विभाग की प्राथमिकता
क्रेडा के जिला प्रभारी के अनुसार, दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में सौर ऊर्जा संयंत्रों को लगातार चालू रखना विभाग की प्राथमिकता है। इसके लिए पुराने पैनलों को बदलने, बैटरियों की स्थिति की निगरानी करने और तकनीकी समस्याओं का समाधान करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
तौरेंगा में पुराने पैनलों को बदलकर संयंत्र चालू करने की कार्रवाई के साथ विभाग ने ग्रामीणों से भी सहयोग की अपील की है। सौर संयंत्रों का उचित उपयोग, समय पर रखरखाव और तकनीकी खराबियों का शीघ्र निराकरण होने से दूरस्थ गांवों में रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।





