10 अक्टूबर को बाल गोपाल अस्पताल से हुआ था लापता, सफेद ईको वैन में ले जाने की बताई कहानी; अभनपुर के पास पैदल जाते समय परिचित ने पहचाना, परिजनों ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की।
मैनपुर। गरियाबंद जिले के मैनपुर तहसील अंतर्गत ग्राम धवलपुर निवासी पीतम यादव (पिता चैतुराम यादव) करीब 10 दिन बाद घायल अवस्था में अपने घर पहुंचा है। वह 7 अक्टूबर 2026 को रायपुर के बाल गोपाल अस्पताल से लापता हुआ था। परिजनों के अनुसार, युवक के मिलने के बाद उसने अपहरण, बंधक बनाए जाने और मारपीट की जो कहानी बताई है, वह बेहद गंभीर है।
पीतम के बताए घटनाक्रम के अनुसार, उसे सफेद रंग की ईको वैन में बैठाकर बिलासपुर ले जाया गया, जहां करीब चार दिनों तक एक बंद कमरे में रखा गया। उसने आरोप लगाया कि वहां से भागने की कोशिश करने पर उसके साथ मारपीट की गई और चाकू तथा लोहे के सरिये से हमला किया गया। हालांकि, इस घटनाक्रम और आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा पुलिस की आधिकारिक पुष्टि अभी आवश्यक है।
अस्पताल से घूमने के बहाने बुलाया, सिर पर किया वार
पीतम के अनुसार, वह अपनी दीदी और जीजा के साथ रायपुर के बाल गोपाल अस्पताल गया था। वहां उसकी बहन के बच्चे का इलाज चल रहा था। इसी दौरान एक अनजान युवक ने उसे घूमने के बहाने अस्पताल के किनारे बुलाया।
पीतम का दावा है कि जैसे ही वह वहां पहुंचा, दूसरे युवक ने पीछे से उसके सिर पर जोरदार वार कर दिया, जिससे वह बेहोश हो गया। इसके बाद उसे क्या हुआ, इसकी जानकारी उसे होश आने पर मिली। जब उसकी आंख खुली तो उसने खुद को बिलासपुर के एक बंद कमरे में पाया।
बिलासपुर में चार दिन बंधक रखने का दावा, भागने पर चाकू से हमला
पीतम ने बताया कि उसे सफेद रंग की ईको वैन से बिलासपुर ले जाया गया था। उसके अनुसार, वहां उसे करीब चार दिनों तक बंद कमरे में रखा गया और दिन में केवल एक बार खाना दिया जाता था।
पीतम का आरोप है कि जब उसने पहली बार वहां से भागने की कोशिश की, तो कथित अपहरणकर्ताओं ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद उसके पैर में चाकू घोंप दिया और लोहे के सरिये से पीठ सहित शरीर के अन्य हिस्सों पर कई वार किए।
इस घटना के बाद पीतम के शरीर पर चोटों के निशान होने की बात सामने आई है। उसके बताए घटनाक्रम की पुष्टि चिकित्सकीय दस्तावेजों और पुलिस जांच से होना बाकी है।
किसी तरह बचकर निकला, बस की मदद से पहुंचा रायपुर
पीतम के मुताबिक, लगातार मारपीट और चोटों के बावजूद उसने हिम्मत नहीं हारी। करीब चार दिन तक बंधक रहने के बाद वह किसी तरह वहां से निकलने में सफल रहा। इसके बाद उसने एक बस चालक से मदद मांगी और बिलासपुर से रायपुर पहुंचा।
पीतम ने बताया कि वह बुरी तरह डरा हुआ और घायल था। रायपुर पहुंचने के बाद उसने रात बस स्टैंड पर बिताई। अगले दिन वह अपने घर की ओर जाने के लिए पैदल निकल पड़ा।
अभनपुर के पास परिचित ने पहचाना, राजिम में कराया उपचार
रायपुर से पैदल अपने घर की ओर जाते समय अभनपुर के पास एक परिचित की नजर पीतम पर पड़ी। घायल और बदहवास हालत में होने के बावजूद परिचित ने उसे पहचान लिया।
इसके बाद वह पीतम को राजिम के एक अस्पताल लेकर पहुंचा, जहां उसके जख्मों पर पट्टी की गई और प्राथमिक उपचार कराया गया। उपचार के बाद उसे सुरक्षित उसके गृह ग्राम धवलपुर पहुंचाया गया।
10 दिन बाद घर पहुंचा युवक, परिजनों ने ली राहत की सांस
पीतम के करीब 10 दिन बाद घायल अवस्था में मिलने से परिजनों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, उसके साथ कथित तौर पर हुई घटना ने परिवार की चिंता बढ़ा दी है। परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की है।
उनकी मांग है कि अस्पताल से लापता होने से लेकर बिलासपुर में कथित रूप से बंधक बनाए जाने और मारपीट किए जाने तक की घटनाओं की जांच की जाए। साथ ही, आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
पुलिस जांच से खुलेगा पूरे मामले का राज
रायपुर के अस्पताल से युवक के लापता होने और फिर कई दिनों बाद घायल अवस्था में मिलने का मामला गंभीर है। पीतम के बयान के आधार पर कथित अपहरण की परिस्थितियों, उसे बिलासपुर ले जाने, वहां बंधक बनाए जाने और हमले की घटनाओं की जांच जरूरी है।
फिलहाल, इस मामले में पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया, एफआईआर की स्थिति और संदिग्धों की पहचान संबंधी जानकारी उपलब्ध नहीं है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि घटना किस तरह हुई और इसके पीछे कौन लोग शामिल थे।




