गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्वैच्छिक विस्थापन/पुनर्वास योजना (Voluntary Relocation/Rehabilitation Scheme) के तहत एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। दिनांक 17 सितंबर 2026 को जिला कलेक्टर रणवीर शर्मा और उदंती-सीतानदी व्याघ्र प्रोजेक्ट (USTR) के उपनिदेशक वरुण जैन ने इच्छुक ग्राम जुगाड़ का दौरा किया। इस दौरान ग्रामीणों के साथ विस्थापन और पुनर्वास से संबंधित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
अधिकारियों का ग्राम जुगाड़ दौरा और ग्रामीणों से संवाद
कलेक्टर रणवीर शर्मा और USTR उपनिदेशक वरुण जैन के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय टीम ने ग्राम जुगाड़ पहुंचकर स्थानीय निवासियों के साथ मुलाकात की। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य स्वैच्छिक विस्थापन और पुनर्वास योजना के संबंध में ग्रामीणों की चिंताओं, शंकाओं और सुझावों को समझना था। अधिकारियों ने ग्रामीणों को योजना की बारीकियों से अवगत कराया और उनके प्रश्नों के उत्तर दिए।
21 सितंबर को जिला कार्यालय में होगी विस्तृत बैठक
ग्राम जुगाड़ में हुई प्रारंभिक चर्चा के बाद, इस महत्वपूर्ण विषय पर विस्तृत चर्चा हेतु अगली बैठक का आयोजन सुनिश्चित किया गया है। यह बैठक दिनांक 21 सितंबर 2026 को जिला कार्यालय गरियाबंद में होगी। इस बैठक में विस्थापन और पुनर्वास से जुड़े सभी पहलुओं, जैसे- मुआवजा पैकेज, पुनर्वास स्थल, रोजगार के अवसर, और अन्य सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
बैठक में उपस्थित रहे प्रमुख अधिकारी
ग्राम जुगाड़ के इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान निम्नलिखित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे:
गोपाल सिंह कश्यप, सहायक संचालक, उदंती वन्यजीव अभयारण्य
चन्द्रबली ध्रुव, परिक्षेत्र अधिकारी, दक्षिण उदंती
ज्योति ध्रुव, परिक्षेत्र अधिकारी, उत्तर उदंती
परिक्षेत्र सहायक, जुगाड़ रेंज
परिक्षेत्र सहायक, करलाझर रेंज
वनरक्षक, जांगड़ा
वनरक्षक, कुररुभाठा
इन सभी अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ संवाद में सक्रिय भाग लिया और उनकी समस्याओं को सुना।
स्वैच्छिक विस्थापन योजना का महत्व
स्वैच्छिक विस्थापन और पुनर्वास योजना का उद्देश्य उन परिवारों को बेहतर जीवन सुविधाएं प्रदान करना है जो वर्तमान में वन क्षेत्रों या अभयारण्यों के निकट निवास करते हैं। इस योजना के तहत परिवारों को उचित मुआवजा, आवास, और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाते हैं। गरियाबंद जिले में उदंती-सीतानदी व्याघ्र प्रोजेक्ट के तहत इस योजना को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
100% सहमति पर उठे सवाल: क्या 60% ग्रामीणों की सहमति से मिलेगा फायदा?
विस्थापन प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण मुद्दा यह उठा है कि स्वैच्छिक विस्थापन के लिए 100% ग्रामीणों की सहमति अनिवार्य है। स्थानीय ग्रामीणों और विशेषज्ञों का कहना है कि यदि केवल 60% ग्रामीण ही विस्थापन के लिए तैयार होते हैं, तो इससे विस्थापन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है
वनजीवों के स्वच्छंद विचरण के लिए पूरा क्षेत्र खाली होना जरूरी
वनजीवों को स्वच्छंद विचरण के लिए गांव के जंगल या पूरा गांव पूरी तरह से खाली होना चाहिए। यदि कुछ ग्रामीण स्वैच्छिक विस्थापन की शर्तों को नहीं मान रहे हैं, तो विस्थापन प्रक्रिया में यह प्रश्नचिन्ह लग जाता है
वन विभाग की शर्तें और स्वैच्छिक विस्थापन
वन विभाग की स्वैच्छिक विस्थापन योजना की शर्तों में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि ग्रामीण अपनी स्वयं की इच्छा से विस्थापन चाहते हैं, तभी उन्हें विस्थापन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। ऐसे में विस्थापन प्रक्रिया कैसे फल-फूल सकती है, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है
प्रमुख बिंदु:
100% सहमति आवश्यक: स्वैच्छिक विस्थापन के लिए सभी ग्रामीणों की सहमति अनिवार्य मानी जा रही है।
60% सहमति पर्याप्त नहीं: केवल 60% ग्रामीणों की सहमति से विस्थापन प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती।
वनजीवों का स्वच्छंद विचरण: वनजीवों के सुरक्षित विचरण के लिए पूरा क्षेत्र खाली होना जरूरी है।
प्रक्रिया में बाधा: कुछ ग्रामीणों के असहमत होने से पूरी विस्थापन प्रक्रिया प्रभावित होती है।
ग्राम सभा की सहमति पर केंद्रीय स्पष्टीकरण
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय (MoTA) ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि वन अधिकार अधिनियम, 2006 में चरण-II वन स्वीकृति के लिए ग्राम सभा की 100% सहमति प्राप्त करने का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि, संसदीय समिति ने बड़े हाइड्रोपावर परियोजनाओं के लिए 70% से 75% ग्राम सभा सहमति का सुझाव दिया है
स्थानीय स्तर पर बहस जारी
गरियाबंद जिले में स्वैच्छिक विस्थापन योजना को लेकर स्थानीय स्तर पर बहस जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उचित मुआवजा और पुनर्वास सुविधाएं प्रदान की जाएं, तभी वे विस्थापन के लिए तैयार होंगे। 21 सितंबर को जिला कार्यालय में होने वाली बैठक में इन सभी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है।





