नई दिल्ली। 15 अक्टूबर 2026 से देश के डिजिटल भुगतान के चेहरे पर एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। छह साल तक मुफ्त रहने के बाद अब UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने जा रहा है, और इस MDR पर 18% GST भी लगेगा। लेकिन सरकार का साफ कहना है – आम उपभोक्ताओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
क्या है पूरा मामला?
सितंबर 2026 के दूसरे हफ्ते में नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने एक नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें बताया गया कि 15 अक्टूबर से पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लगेगा। यह चार्ज सिर्फ 2,000 रुपये से ऊपर के लेनदेन पर ही लागू होगा।
यानी अगर आप किसी दुकानदार को 1,500 रुपये का UPI पेमेंट करते हैं, तो कुछ नहीं बदलेगा। लेकिन अगर पेमेंट 3,000 रुपये का है, तो दुकानदार को 0.4% MDR चुकाना होगा।
MDR क्या होता है?
सरफ़ शब्दों में कहें तो MDR वह फीस है जो मर्चेंट अपने बैंक या पेमेंट प्रोवाइडर को देता है जब कोई ग्राहक डिजिटल पेमेंट करता है। क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर यह चार्ज पहले से लग रहा था, लेकिन UPI पर 2020 से इसे जीरो रखा गया था।
अब छह साल बाद इस व्यवस्था को वापस लाया जा रहा है।
कितना लगेगा चार्ज?
0.4% MDR – यह रेट उन सभी P2M ट्रांजैक्शन पर लगेगा जो 2,000 रुपये से ऊपर के हैं। लेकिन राहत की बात यह है कि इस पर एक कैप भी तय किया गया है।
अगर ट्रांजैक्शन 75,000 रुपये या उससे ज्यादा का है, तो MDR अधिकतम 300 रुपये ही लगेगा। यानी चाहे आप 1 लाख रुपये का पेमेंट करें या 5 लाख, MDR 300 रुपये से ज्यादा नहीं होगा।
उदाहरण के तौर पर:
3,000 रुपये का पेमेंट → MDR = 12 रुपये
10,000 रुपये का पेमेंट → MDR = 40 रुपये
50,000 रुपये का पेमेंट → MDR = 200 रुपये
75,000 रुपये और ऊपर → MDR = अधिकतम 300 रुपये
GST का खेल
अब यहां आता है सबसे अहम सवाल – क्या इस MDR पर GST भी लगेगा?
सरकारी अधिकारियों ने साफ किया है कि MDR पर 18% GST लगेगा, लेकिन यह GST मूल बिल पर नहीं, सिर्फ MDR की रकम पर लगेगा।
उदाहरण: अगर आपने 10,000 रुपये का UPI पेमेंट किया, तो:
MDR = 40 रुपये (0.4%)
GST on MDR = 7.20 रुपये (18% of 40)
कुल चार्ज मर्चेंट के लिए = 47.20 रुपये
यानी मर्चेंट को कुल 47.20 रुपये का खर्च आएगा, न कि 10,000 रुपये पर अलग से GST
कौन देगा यह पैसा?
सरकार और NPCI दोनों ने बार-बार दोहराया है कि यह चार्ज ग्राहक नहीं, मर्चेंट देगा। कोई भी दुकानदार या व्यापारी इस MDR का बोझ अपने ग्राहकों पर नहीं डाल सकता।2
अगर कोई मर्चेंट ग्राहक से एक्स्ट्रा चार्ज करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
किन चीजों पर नहीं लगेगा MDR?
सभी UPI ट्रांजैक्शन पर यह चार्ज नहीं लगेगा। कुछ अहम छूटें भी दी गई हैं:
P2P ट्रांजैक्शन – एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे गए पैसे पूरी तरह फ्री रहेंगे, चाहे रकम कितनी भी हो।
2,000 रुपये तक के P2M पेमेंट – छोटे व्यापारियों को राहत देने के लिए 2,000 रुपये तक के सभी मर्चेंट पेमेंट फ्री रहेंगे।
कुछ खास सेक्टर्स – रेलवे, टेलीकॉम सर्विस, इंश्योरेंस और ईंधन (fuel) जैसे सेक्टर्स में 2,000 रुपये से ऊपर के पेमेंट पर सिर्फ 5 रुपये का फ्लैट MDR लगेगा, न कि 0.4%।
छोटे मर्चेंट – जो मर्चेंट GST रजिस्टर्ड नहीं हैं या जिनका टर्नओवर कम है, उन्हें इससे छूट मिल सकती है।
मर्चेंट को राहत: Input Tax Credit
एक अच्छी खबर मर्चेंट्स के लिए यह है कि वे इस GST पर Input Tax Credit (ITC) क्लेम कर सकेंगे।
यानी अगर एक दुकानदार को 47.20 रुपये (40 रुपये MDR + 7.20 रुपये GST) का खर्च आया, तो वह अपने GST रिटर्न में इस 7.20 रुपये का क्रेडिट ले सकता है और अपनी GST लायबिलिटी से इसे कम कर सकता है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इससे मर्चेंट्स पर टैक्स का असली बोझ कम हो जाएगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
पिछले छह साल से UPI पर जीरो MDR का मतलब था कि बैंक, पेमेंट ऐप्स और NPCI को इस इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने का खर्च खुद उठाना पड़ रहा था।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पेमेंट इंडस्ट्री के खिलाड़ियों का लंबे समय से यह कहना था कि UPI इंफ्रास्ट्रक्चर चलाने की लागत बहुत ज्यादा है और इसे चलाने के लिए कुछ रेवेन्यू जरूरी है।
सरकार का तर्क है कि यह मामूली चार्ज डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को और मजबूत बनाने में मदद करेगा।newindianexpress+1
विपक्ष का विरोध
वहीं, कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों ने इस फैसले की आलोचना की है। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि यह डिजिटल इंडिया के विचार के खिलाफ है और छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डालेगा।
कितना रेवेन्यू आएगा?
इंडियन एक्सप्रेस की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, सरकार को उम्मीद है कि इस MDR से सालाना करीब 15,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू आएगा, जो पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को और बेहतर बनाने में लगाया जाएगा।
हालांकि, चूंकि मर्चेंट इस GST पर ITC क्लेम कर सकेंगे, इसलिए सरकार को नेट रेवेन्यू बहुत कम मिलने की उम्मीद है।
आम आदमी के लिए क्या मतलब?
सरकार का साफ संदेश है – आम उपभोक्ताओं के लिए UPI अभी भी फ्री है।
दोस्त को पैसे भेजने पर कोई चार्ज नहीं
2,000 रुपये तक की खरीदारी पर कोई चार्ज नहीं
मर्चेंट आपको एक्स्ट्रा चार्ज नहीं कर सकता
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि लगभग 96% मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
क्या बदलेगा 15 अक्टूबर के बाद?
15 अक्टूबर 2026 को जब यह नया नियम लागू होगा, तो:
- बैंकों, पेमेंट एग्रीगेटर्स और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स के पास सिस्टम अपडेट करने का पूरा समय मिल गया है।
- मर्चेंट्स को अपने बिलिंग सिस्टम में बदलाव करना होगा।
- ग्राहकों को किसी एक्स्ट्रा चार्ज की चिंता नहीं करनी चाहिए।
UPI पर MDR और GST का यह नया फ्रेमवर्क निश्चित रूप से डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लिए एक बड़ा बदलाव है। सरकार का दावा है कि यह कदम लंबे समय में डिजिटल इंडिया को मजबूत करेगा, जबकि आलोचकों का कहना है कि यह छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है।
फिलहाल, एक बात तो साफ है – आम उपभोक्ताओं के लिए UPI अभी भी फ्री है, और सरकार का यह कहना है कि यह स्थिति बनी रहेगी।


