राधे पटेल / गरियाबंद वन्यजीव संरक्षण को लेकर बढ़ी जागरूकता
छत्तीसगढ़ के उदंती क्षेत्र में आयोजित जिप्सी सफारी के दौरान भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों एवं अतिथियों ने दुर्लभ वन्यजीवों का अवलोकन किया। इस दौरान विशेष रूप से उड़न गिलहरी के प्रत्यक्ष दर्शन हुए, जो इस क्षेत्र की जैव विविधता को दर्शाता है।
जानकारी के अनुसार, भारत सरकार के संयुक्त सचिव श्री वेद प्रकाश मिश्र, प्रोजेक्ट एलीफैंट की स्टीयरिंग समिति के सदस्य श्री मंसूर खान तथा गोवा से आई महिला बाइक राइडर टीम ने उदंती में जिप्सी सफारी का अनुभव लिया। इस सफारी के दौरान वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके संरक्षण की स्थिति का भी अवलोकन किया गया।
उड़न गिलहरी का दिखना बना खास आकर्षण
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व अपने समृद्ध वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। यहां उड़न गिलहरी जैसी दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी इस क्षेत्र की विशेष पारिस्थितिकी को दर्शाती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह प्रजाति आमतौर पर घने जंगलों में पाई जाती है और इसके दर्शन बेहद दुर्लभ होते हैं।
सफारी के दौरान उड़न गिलहरी का प्रत्यक्ष दर्शन होना अधिकारियों और टीम के लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव रहा। यह घटना क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण के सकारात्मक परिणामों को भी दर्शाती है।
वन एवं वन्यजीव संरक्षण के लिए पहल
इस अवसर पर श्री मंसूर खान द्वारा वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाने हेतु बैनर भी प्रदाय किया गया। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय लोगों और पर्यटकों को जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।
उदंती क्षेत्र में वन विभाग द्वारा लगातार संरक्षण और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जिससे न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित हो रही है, बल्कि स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी बढ़ रही है।
जैव विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र बना उदंती
उदंती-सीतानदी क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के वन्यजीवों और वनस्पतियों का संरक्षण किया जा रहा है। यहां बाघ, भालू, गौर और कई दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं, जो इसे देश के प्रमुख वन्यजीव क्षेत्रों में शामिल करती हैं।
उड़न गिलहरी जैसे जीवों की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि यहां का प्राकृतिक वातावरण वन्यजीवों के लिए अनुकूल बना हुआ है।
उदंती में आयोजित जिप्सी सफारी न केवल एक पर्यटन अनुभव रही, बल्कि इसने वन्यजीव संरक्षण के महत्व को भी उजागर किया। अधिकारियों द्वारा की गई पहल और जागरूकता अभियान भविष्य में पर्यावरण संरक्षण को और मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।


