करका में गर्डलिंग के शिकार 3,500 पेड़ों को बचाने कर्नाटक से आएंगे ‘ट्री डॉक्टर’ विजय निशांत; करेंगे वैज्ञानिक सर्जरी
ड्रोन और इसरो सैटेलाइट सर्वे से हुआ खुलासा: 22 से बढ़कर 102.47 हेक्टेयर में फैला अवैध अतिक्रमण
अमले में 65% पद रिक्त और जानलेवा हमलों के बावजूद विभाग ने 1,000 हेक्टेयर वन भूमि कराई मुक्त
साल, बीजा और तेंदू के पेड़ों की छाल छीलकर सुखाने की साजिश, अब ब्रिज ग्राफ्टिंग से बचाने की तैयारी

गरियाबंद / धमतरी- महानदी के उद्गम क्षेत्र में स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) के अंतर्गत करका क्षेत्र में बड़े पैमाने पर वनों की अवैध कटाई और अतिक्रमण का गंभीर मामला सामने आया है। हाल ही में कराए गए डीजीपीएस-सक्षम (DGPS) ड्रोन सर्वे और इसरो (ISRO) की 2010 व 2016 की सैटेलाइट तस्वीरों के तुलनात्मक अध्ययन से खुलासा हुआ है कि बीते एक दशक में यहां 1.25 लाख से अधिक पेड़ साफ कर दिए गए हैं। वर्ष 2016 में जहां अतिक्रमण का दायरा 22 हेक्टेयर था, वह 2026 में चार गुने से भी अधिक बढ़कर 102.47 हेक्टेयर तक पहुंच चुका है।
इस गंभीर क्षति के बीच विभाग ने गर्डलिंग (तने के चारों ओर की छाल काटकर सुखाना) के शिकार हुए हजारों पेड़ों को नया जीवन देने की अनूठी पहल शुरू की है। इसके तहत कर्नाटक के विख्यात ‘ट्री डॉक्टर’ विजय निशांत (प्रोजेक्ट वृक्ष फाउंडेशन) अगले सप्ताह टाइगर रिजर्व का दौरा करेंगे और वैज्ञानिक वृक्ष-सर्जरी व ब्रिज ग्राफ्टिंग के जरिए इन पेड़ों का उपचार करेंगे।
3,500 से अधिक पेड़ों को सुखाने की साजिश, अतिक्रमण बढ़ाने का खेल
क्षेत्रीय निरीक्षण के दौरान टाइगर रिजर्व प्रबंधन को 3,500 से अधिक ऐसे पेड़ मिले हैं, जिन्हें गर्डलिंग कर सुखाने का प्रयास किया गया है। इनमें मुख्य रूप से साल, बीजा और तेंदू की बेशकीमती प्रजातियां शामिल हैं। गर्डलिंग के तहत तने की छाल की रिंग निकाल दी जाती है, जिससे जड़ों तक पोषक तत्वों का संवहन रुक जाता है और पेड़ सूखकर गिर जाता है। हाल के दिनों में भी कई ताजे कटे पेड़ मिले हैं, जिससे साफ है कि जमीन हड़पने की नीयत से संगठित रूप से पेड़ों को नष्ट किया जा रहा है।
65% पद रिक्त, 5 बार जानलेवा हमले; फिर भी 1,000 हेक्टेयर जमीन कराई मुक्त
टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुसार, मैदानी अमले में 65 प्रतिशत पद रिक्त होने और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पिछले 4 वर्षों में 1,000 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। इस अभियान के दौरान वनकर्मियों पर 5 बार जानलेवा हमले हुए और उन पर कई झूठे आरोप भी मढ़े गए। इस बहादुरी भरे कदम से बाघ, हाथी, विशाल गिलहरी और संकटग्रस्त पक्षियों के प्राकृतिक आवास व वन्यजीव गलियारों को सुरक्षित रखने में बड़ी मदद मिली है।
पारंपरिक आदिवासी ज्ञान और आधुनिक तकनीक का होगा संगम
वर्ष 2022 में तौरेंगा रेंज में ब्रिज ग्राफ्टिंग का प्रयोग किया गया था, जिसमें करीब 10 प्रतिशत सफलता मिली थी। इस बार सफलता दर बढ़ाने के लिए बाहरी विशेषज्ञ की मदद ली जा रही है। श्री विजय निशांत न केवल पेड़ों की स्थिति जांचकर उनकी सर्जरी करेंगे, बल्कि स्थानीय वनकर्मियों को उपचार के बाद निगरानी का प्रशिक्षण भी देंगे।
इसके साथ ही, टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने आसपास के स्थानीय आदिवासी समुदायों और वनवासियों से भी संपर्क साधा है। आदिवासियों के जंगलों और पेड़ों के पारंपरिक उपचार ज्ञान तथा आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियों को एक साथ जोड़कर इन पेड़ों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जाएगा।
डिस्क्लेमर: यह समाचार संबंधित विभाग द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। समाचार में दी गई जानकारी का स्रोत विभागीय प्रेस विज्ञप्ति है।






