गरियाबंद।सामान्य वन मंडल गरियाबंद के अंतर्गत आने वाले धवलपुर के जंगलों में लगी भीषण आग के दौरान अपने परिवार से बिछड़ गए दो नन्हे हिरण अब पूरी तरह स्वस्थ हैं। लगभग साढ़े तीन महीने के हो चुके ये दोनों शावक अब पहले से काफी चंचल, सक्रिय और शरारती हो गए हैं। वन विभाग की सतर्क देखरेख और नियमित देखभाल के कारण इनका स्वास्थ्य लगातार बेहतर हो रहा है।
वर्तमान में दोनों हिरण शावकों को उत्तर उदंती परिक्षेत्र के सॉफ्ट रिलीज एनक्लोजर सेंटर में रखा गया है, जिसे स्थानीय लोग आम बोलचाल की भाषा में “चीतल बाड़ा” के नाम से जानते हैं। यहां उन्हें प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि भविष्य में उन्हें जंगल में छोड़ने के लिए तैयार किया जा सके।
वन विभाग के अनुसार, इन दोनों हिरण शावकों की देखरेख उत्तर उदंती की रेंजर ज्योति ध्रुव और उनकी टीम द्वारा लगातार की जा रही है। टीम समय-समय पर उनके स्वास्थ्य की जांच, पौष्टिक आहार और व्यवहार पर नजर रख रही है। वनकर्मियों की मेहनत का ही परिणाम है कि आग की भयावह घटना के बाद भी दोनों शावक सुरक्षित जीवन की ओर लौट आए हैं।
वन अधिकारियों का कहना है कि जंगल की आग के दौरान कई वन्यजीव अपने झुंड या परिवार से बिछड़ जाते हैं। ऐसे मामलों में उनका त्वरित रेस्क्यू, उपचार और पुनर्वास बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। सॉफ्ट रिलीज एनक्लोजर में वन्यजीवों को इस तरह रखा जाता है कि वे धीरे-धीरे प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढाल सकें और भविष्य में सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़े जा सकें।
इन दोनों नन्हे हिरणों की बढ़ती उम्र और स्वस्थ स्थिति वन विभाग के सफल संरक्षण प्रयासों की मिसाल बन रही है। वन विभाग को उम्मीद है कि उचित समय आने पर दोनों हिरण पूरी तरह आत्मनिर्भर होकर अपने प्राकृतिक आवास में वापस लौट सकेंगे।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में आग जैसी घटनाओं के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा और बचाव के लिए त्वरित कार्रवाई अत्यंत आवश्यक होती है। ऐसे संरक्षण प्रयास न केवल वन्यजीवों का जीवन बचाते हैं, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

