राधे पटेल / गरियाबंद 
रायपुर। सामुदायिक नेतृत्व और अधिकार-आधारित विकास के लिए कार्यरत संगठन KHOJ ने अपने 20 वर्षों के सफल सफर का उत्सव रायपुर में मनाया। यह कार्यक्रम बीते दो दशकों की उपलब्धियों पर चिंतन करने और आने वाले वर्षों की रणनीति तय करने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। कार्यक्रम में देशभर से सिविल सोसायटी संगठनों, सरकारी प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और सामुदायिक नेताओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान वर्ष 2005 से KHOJ की यात्रा, संगठनात्मक विकास की प्रक्रिया और भविष्य की रणनीतिक रूपरेखा की विस्तृत समीक्षा की गई। इसका मुख्य उद्देश्य समुदायों के साथ गहरे जुड़ाव को मजबूत करना तथा अधिकार-आधारित और सतत विकास पहलों को और अधिक प्रभावी बनाना रहा।
KHOJ के कार्यकारी सचिव बेनीपुरी गोस्वामी ने संगठन के विकासक्रम को साझा करते हुए बताया कि प्रारंभिक स्तर पर छोटे-छोटे सामुदायिक समूहों के साथ शुरू हुई पहल आज व्यापक नेटवर्क का रूप ले चुकी है। उन्होंने बताया कि संगठन ने सामुदायिक वन संसाधन (CFR) अधिकार सुनिश्चित करने और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से सतत आजीविका को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कार्यक्रम में विजेंद्र अजनाबी ने संगठन की प्रमुख उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण करते हुए कहा कि बदलती सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच KHOJ की भूमिका को समयानुकूल ढंग से पुनः परिभाषित करना आवश्यक है।
इस अवसर पर डॉ. के. सुब्रमण्यम ने प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित आजीविकाओं पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने कृषि और वनों की उत्पादकता में गिरावट, अनियमित वर्षा और बढ़ते जल संकट को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने सिविल सोसायटी संगठनों के बीच बेहतर सहयोग, जमीनी वास्तविकताओं का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण और नीतिगत स्तर पर सक्रिय हस्तक्षेप की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने जल संकट से प्रेरित पलायन की निगरानी तथा कुपोषण से निपटने के लिए स्थानीय वन आधारित खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने की जरूरत भी बताई।
कार्यक्रम में वन शासन, जल संकट, सतत आजीविका और रणनीतिक साझेदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस दौरान TISS, PRADAN, वसुंधरा, CEED और WHH इंडिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और विचार साझा किए। इससे साक्ष्य-आधारित और समुदाय-नेतृत्व वाले दृष्टिकोण की महत्ता और अधिक स्पष्ट हुई।
कार्यक्रम के दौरान KHOJ द्वारा तैयार किए गए जागरूकता पोस्टरों का भी विमोचन किया गया। इन पोस्टरों को क्षेत्रीय स्तर पर व्यापक रूप से प्रसारित कर समुदायों में जागरूकता बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
परिवर्तनकर्ताओं का सम्मान
इस अवसर पर जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट नेतृत्व और सामाजिक योगदान देने वाले कई व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।
श्रीमती महंती, ग्राम सभा अध्यक्ष, घाटकेवाली (बस्तर), को ग्राम सभा के प्रभावी संचालन, विवाद समाधान और सामुदायिक वन प्रबंधन को सशक्त बनाने के लिए सम्मानित किया गया। उनके प्रयासों से ग्राम स्तर पर सामूहिक निर्णय प्रक्रिया मजबूत हुई है और वन संसाधनों के संरक्षण में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
वहीं, डॉ. दिनेश मिश्रा को वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने, अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता फैलाने तथा जन स्वास्थ्य जागरूकता, विशेष रूप से नेत्र चिकित्सा और नेत्रदान के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
KHOJ के 20 वर्षों का यह उत्सव केवल उपलब्धियों का जश्न नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी रहा। कार्यक्रम में उभरे विचारों और रणनीतियों से यह स्पष्ट हुआ कि सामुदायिक नेतृत्व और साझेदारी आधारित प्रयास आने वाले समय में सतत और समावेशी विकास की आधारशिला साबित होंगे।


