राधे पटेल / गरियाबंद गरियाबंद। राजिम क्षेत्र के ग्राम देवरी में इन दिनों एक ओर खेतों में फसल लहलहा रही है, तो वहीं दूसरी ओर “करगा झरगा” नामक खरपतवार ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। यह खरपतवार तेजी से फैलकर फसलों के पोषण और विकास को प्रभावित कर रहा है, जिससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका सता रही है।
भीषण गर्मी के बावजूद किसान सुबह सूरज निकलने से पहले ही खेतों में पहुंच जाते हैं और दिनभर कड़ी मेहनत करते हुए करगा झरगा को जड़ से उखाड़ने में लगे रहते हैं। हंसिया की सहायता से इसे काटकर फसल से अलग किया जा रहा है, फिर चूमड़ी (टोकरी) में भरकर खेत के बाहर फेंका जा रहा है। यह प्रक्रिया बेहद श्रमसाध्य और समय लेने वाली है, लेकिन फसल को बचाने के लिए किसानों के पास फिलहाल यही एकमात्र उपाय बचा है।
गांव के किसान सुकदेव साहू बताते हैं कि इस बार फसल अच्छी स्थिति में थी और उत्पादन को लेकर उम्मीदें भी बेहतर थीं, लेकिन करगा झरगा ने पूरी मेहनत पर पानी फेरने की आशंका पैदा कर दी है। उनका कहना है, “अगर इसे समय रहते साफ नहीं किया गया, तो यह पूरी फसल को नष्ट कर सकता है। हम रोज सुबह से शाम तक इसे हटाने में लगे हैं, फिर भी यह तेजी से फैल रहा है।”
किसानों के अनुसार, करगा झरगा न केवल फसल के पोषक तत्वों को खींच लेता है, बल्कि इसकी वजह से फसल का विकास भी रुक जाता है। इससे उत्पादन में गिरावट आने का खतरा बना हुआ है। कई किसानों ने बताया कि इस समस्या के कारण उन्हें अतिरिक्त मजदूरी लगानी पड़ रही है, जिससे खेती की लागत भी लगातार बढ़ रही है।
देवरी सहित आसपास के गांवों में भी करगा झरगा का असर धीरे-धीरे फैलता नजर आ रहा है, जिससे क्षेत्र के किसान चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही इस पर नियंत्रण के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किया गया, तो बड़े पैमाने पर फसल नुकसान हो सकता है। किसानों ने संबंधित विभाग से इस समस्या के समाधान के लिए तकनीकी मार्गदर्शन एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।


