कोसमी के जंगल में बेशकीमती सरई के पेड़ काटे जाने की ग्रामीणों ने दी जानकारी; रेंजर बोले—मौके पर स्टाफ भेजकर कराएंगे जांच
गरियाबंद। जंगलों के संरक्षण और संवर्धन के लिए वन विभाग द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद यदि जंगलों में पेड़ों की अवैध कटाई होती है, तो यह वन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सामान्य वनमंडल के नवागढ़ परिक्षेत्र अंतर्गत कोसमी के कक्ष क्रमांक 701/2 में बेशकीमती साल (सरई) के पेड़ों की कटाई की सूचना सामने आई है। स्थानीय ग्रामीणों ने वन क्षेत्र में अवैध कटाई और नियमित गश्त की कमी को लेकर चिंता जताई है।
जंगल में लकड़ी काटने की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी नहीं होने से कीमती पेड़ों को नुकसान पहुंच रहा है। दूसरी ओर, वन विभाग द्वारा जंगलों के संरक्षण के लिए कंटूर ट्रेंच और कैटल प्रूफ ट्रेंच (सीपीटी) जैसे कार्य कराए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों के साथ वन सुरक्षा और मैदानी निगरानी कितनी प्रभावी है।
कोसमी के जंगल में साल के पेड़ों की कटाई की शिकायत
कक्ष क्रमांक 701/2 में बल्ली के आकार के बेशकीमती साल के पेड़ काटे जाने की जानकारी सामने आई है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते निगरानी और कार्रवाई नहीं हुई, तो जंगल को और नुकसान हो सकता है।
हालांकि, कटाई में शामिल लोगों की पहचान, काटे गए पेड़ों की वास्तविक संख्या और नुकसान की मात्रा की पुष्टि वन विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल, इस मामले में मौके का निरीक्षण और विभागीय जांच महत्वपूर्ण है।
करोड़ों के संरक्षण कार्यों के बीच निगरानी पर सवाल
वन क्षेत्र में मिट्टी और जल संरक्षण के लिए कंटूर ट्रेंच तथा कैटल प्रूफ ट्रेंच जैसे कार्य कराए जाते हैं। इनका उद्देश्य वन भूमि का संरक्षण, मिट्टी के कटाव को कम करना और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में मदद करना है।
लेकिन यदि इन्हीं जंगलों में पेड़ों की अवैध कटाई की शिकायतें सामने आती हैं, तो केवल निर्माण कार्यों से वन संरक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए नियमित गश्त, अवैध कटाई पर निगरानी और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई भी जरूरी है।
टाइगर रिजर्व और सामान्य वनमंडल की कार्यप्रणाली पर चर्चा
जिले के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन एवं वन्यजीव संरक्षण से संबंधित कार्रवाई के बीच सामान्य वनमंडल के नवागढ़ परिक्षेत्र में सामने आई कटाई की शिकायत ने वन सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि मैदानी कर्मचारियों की नियमित मौजूदगी और गश्त बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि जंगलों में अवैध गतिविधियों पर रोक लग सके। इन आरोपों की वास्तविक स्थिति विभागीय जांच और निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
रेंजर बोले—जानकारी मिली, स्टाफ भेजकर कराऊंगा जांच
मामले में नवागढ़ रेंज के रेंजर बी.एल. सोरी ने कहा, “आपके माध्यम से कक्ष क्रमांक 701/2 में कटाई की जानकारी मिली है। मामले को संज्ञान में लेते हुए स्टाफ को तत्काल मौके पर भेजकर जांच करवाता हूं।”
रेंजर के बयान के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभागीय टीम मौके पर पहुंचकर क्या स्थिति पाती है, कितने पेड़ों की कटाई की पुष्टि होती है और क्या अवैध कटाई में शामिल लोगों की पहचान हो पाती है।
जांच और कार्रवाई पर टिकी नजरें
कोसमी के जंगल में साल के पेड़ों की कटाई की शिकायत के बाद अब वन विभाग की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। ग्रामीण चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, वन क्षेत्र में नियमित गश्त सुनिश्चित की जाए और यदि अवैध कटाई की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब सवाल यह है कि विभाग इस शिकायत पर मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है या नहीं। जंगलों को सुरक्षित रखने के लिए संरक्षण कार्यों के साथ प्रभावी निगरानी और जवाबदेही भी जरूरी है।
नोट : 100 से अधिक छोटे साल वृक्षों की कटाई की गई है , इस समाचार में प्रस्तुत जानकारी स्थानीय ग्रामीणों से प्राप्त शिकायतों एवं संबंधित अधिकारी के बयान पर आधारित है। हमारे इस समाचार का उद्देश्य वन संरक्षण से जुड़े जनहित के मुद्दे को सामने लाना है, न कि किसी व्यक्ति या संस्था को जांच से पहले दोषी ठहराना।





