राजापड़ाव क्षेत्र में दिखी आदिवासी संस्कृति की अनूठी झलक, बस्तरिया सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
मैनपुर। मैनपुर विकासखंड के राजापड़ाव क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गोंना (नयापारा) में रविवार को नवाखाई मिलन समारोह एवं ठाकुर जोहारनी कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। आयोजन में राजापड़ाव क्षेत्र की करीब 8 पंचायतों से करीब 12 हजार लोगों के शामिल हुए । बड़ी संख्या में सगा-पाहुना और ग्रामीणों की मौजूदगी से पूरा आयोजन स्थल उत्सवी माहौल में नजर आया।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार ठाकुर देव की पूजा-अर्चना और आरती के साथ हुई। इसके बाद कार्यक्रम में पहुंचे अतिथियों और सगा-पाहुना का पारंपरिक तरीके से स्वागत-सत्कार किया गया। पीला चावल और पीला गमछा भेंट कर अतिथियों का सम्मान किया गया।
बस्तरिया संस्कृति ने मोहा मन
समारोह में आयोजित बस्तरिया पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में पहुंचे लोगों का मन मोह लिया। आदिवासी समाज की पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को विशेष रंग दे दिया।
गोंडवाना समाज राजापड़ाव क्षेत्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर पहले से ही तैयारियां की गई थीं। आयोजन का मुख्य स्थल नयापारा (गोंना) माता गुड़ी प्रांगण रखा गया था। उपलब्ध पूर्व सूचना के अनुसार नवाखाई पर्व को नए फसल के आगमन की खुशी और पेन-पुरखा शक्तियों को नए अन्न अर्पित करने की परंपरा से जोड़ा गया है।
एकता और भाईचारे का संदेश
नवाखाई मिलन समारोह के दौरान समाज के लोगों ने एक-दूसरे से मुलाकात कर शुभकामनाएं दीं। यह आयोजन केवल धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक एकता, भाईचारे और आपसी सौहार्द का संदेश भी देता नजर आया।
राजापड़ाव क्षेत्र आदिवासी बहुल और दूरस्थ इलाका है। विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी क्षेत्र के कई गांवों में पारंपरिक बिजली सुविधा की चुनौतियों का उल्लेख मिलता है। ऐसे क्षेत्र में हजारों लोगों का एक स्थान पर जुटना सामाजिक एकजुटता की बड़ी तस्वीर पेश करता है।
गोंना में आयोजित नवाखाई मिलन समारोह में दिनभर उत्सव जैसा माहौल रहा। पूजा-अर्चना, पारंपरिक स्वागत और बस्तरिया सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच आदिवासी संस्कृति और परंपरा के संरक्षण का संदेश भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।


