गरियाबंद में वनांचल के ग्रामीणों की परेशानियों को लेकर जिला पंचायत सदस्य ने उठाए सवाल, बोले— आदिवासियों को सुरक्षा चाहिए, प्रताड़ना नहीं
गरियाबंद। जिले के वनांचल क्षेत्रों में रात के समय आवागमन पर प्रतिबंध और दिन में पुलिस की सघन जांच को लेकर जिला पंचायत सदस्य एवं पूर्व उपाध्यक्ष संजय नेताम ने भाजपा सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर वन विभाग की कार्रवाई और विस्थापन की आशंकाओं से ग्रामीणों में भय का माहौल है, वहीं दूसरी ओर जगह-जगह पुलिस की बैरिकेडिंग के कारण आम लोगों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
संजय नेताम ने कहा कि भाजपा सरकार आदिवासी मुख्यमंत्री के नेतृत्व में आदिवासी हितों और कल्याण की बात करती है, लेकिन वनांचल के लोगों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। जंगल, जमीन, आवागमन और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के बीच ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं और सम्मानजनक जीवन मिलना चाहिए।
रात 7 बजे बैरियर बंद, आपात स्थिति में क्या होगा?
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में रात के समय आवागमन पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर संजय नेताम ने चिंता जताई। उन्होंने सवाल किया कि शाम 7 बजे के बाद बैरियर बंद होने की स्थिति में यदि किसी ग्रामीण की तबीयत बिगड़ जाए, किसी गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना पड़े या कोई दुर्घटना हो जाए, तो तत्काल चिकित्सा सहायता कैसे उपलब्ध होगी?
नेताम ने कहा कि वन्यजीवों का संरक्षण जरूरी है, लेकिन जंगलों में पीढ़ियों से निवास कर रहे लोगों की जिंदगी और सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि रात में आवागमन पर लागू प्रतिबंधों का वैधानिक आधार सार्वजनिक किया जाए। साथ ही, एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए 24 घंटे निर्बाध आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी की जान समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण जोखिम में न पड़े।
हसदेव से गरियाबंद तक आदिवासी अधिकारों का मुद्दा
संजय नेताम ने हसदेव अरण्य से लेकर गरियाबंद के वनांचल क्षेत्रों तक आदिवासी समुदाय के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि संरक्षण और विकास के नाम पर स्थानीय निवासियों के अधिकारों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने उदंती-सीतानदी क्षेत्र में विस्थापन को लेकर ग्रामीणों के बीच व्याप्त चिंता पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध वन्यजीव संरक्षण से नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्थाओं से है जिनसे स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़े। नेताम ने कहा कि पेसा कानून, 1996 और वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अनुरूप ग्राम सभाओं के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। विस्थापन जैसे संवेदनशील मामलों में लागू कानूनी प्रक्रिया, पात्रता और ग्राम सभा की भूमिका का विधिसम्मत पालन सुनिश्चित होना चाहिए।
देवभोग से झरियाबाहरा तक बैरिकेडिंग पर सवाल
देवभोग से झरियाबाहरा मार्ग पर जगह-जगह पुलिस बैरिकेडिंग और जांच को लेकर भी संजय नेताम ने आपत्ति जताई। उनके अनुसार, नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए की जा रही जांच के दौरान परिवार के साथ यात्रा करने वाले लोगों और ग्रामीणों को अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मार्ग पर चार स्थानों पर बैरिकेडिंग कर लगातार जांच की जा रही है, तो ग्रामीण इलाकों तक नशीले पदार्थ कैसे पहुंच रहे हैं? उन्होंने पुलिस से छोटे स्तर पर संदेह के आधार पर लोगों को परेशान करने के बजाय तस्करी के मुख्य आरोपियों और बड़े नेटवर्क के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की।
प्रशासन के सामने रखीं ये प्रमुख मांगें
संजय नेताम ने वनांचल के ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर प्रशासन के सामने प्रमुख मांगें रखीं।
- रात में आवागमन: प्रतिबंधों का कानूनी आधार स्पष्ट किया जाए और आपातकालीन वाहनों के लिए चौबीसों घंटे रास्ता उपलब्ध कराया जाए।
- पुलिस जांच: चेकिंग के दौरान निर्दोष ग्रामीणों, महिलाओं और परिवारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार हो तथा अनावश्यक परेशानी रोकी जाए।
- आदिवासी अधिकार: विस्थापन संबंधी मामलों में पेसा कानून, वन अधिकार अधिनियम और ग्राम सभा से जुड़े लागू प्रावधानों का पालन किया जाए।
- बुनियादी सुविधाएं: वनांचल क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और बिजली जैसी आवश्यक सुविधाओं की कमी दूर करने को प्राथमिकता दी जाए।
सुरक्षा और अधिकारों के बीच संतुलन की जरूरत
संजय नेताम के बयान ने वनांचल क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण, ग्रामीणों के आवागमन, पुलिस जांच और आदिवासी अधिकारों से जुड़े सवालों को सामने रखा है। इन मुद्दों पर प्रशासन की ओर से प्रतिबंधों के कानूनी आधार, आपातकालीन आवागमन की व्यवस्था और ग्रामीणों की शिकायतों के समाधान को लेकर स्पष्ट जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
वन्यजीव संरक्षण और कानून-व्यवस्था बनाए रखना जितना जरूरी है, उतना ही आवश्यक है कि स्थानीय निवासियों को स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं तक पहुंचने में अनावश्यक बाधाओं का सामना न करना पड़े। अब देखना होगा कि प्रशासन इन मांगों पर क्या कदम उठाता है।



