राधे पटेल / गरियाबंद बढ़ती पुलिस कार्रवाई और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर छोड़ा हिंसा का रास्ता
दंतेवाड़ा/एटापाका। नक्सल प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्रों में चलाए जा रहे एंटी-माओवादी अभियान के बीच सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता मिली है। शुक्रवार को एक महिला माओवादी कैडर ने एटापाका पुलिस कैंप पहुंचकर आत्मसमर्पण करते हुए हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
आत्मसमर्पण करने वाली महिला की पहचान पोडियम लक्ष्मी उर्फ लक्ष्मी के रूप में हुई है। वह डीकेएसजेडसी के अंतर्गत 2nd CRC, PLGA बटालियन की सदस्य बताई जा रही है। लक्ष्मी ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन) पंकज मीणा की मौजूदगी में स्वेच्छा से आत्मसमर्पण किया।
जानकारी के अनुसार, लक्ष्मी बीजापुर जिले के कमलापुरम गांव की निवासी है। पूछताछ के दौरान उसने बताया कि लगातार बढ़ती पुलिस कार्रवाई, नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना, शीर्ष माओवादी नेताओं के एनकाउंटर और माओवादी विचारधारा से मोहभंग होने के कारण उसने संगठन छोड़ने का फैसला लिया। साथ ही सरकार की पुनर्वास और आत्मसमर्पण नीति ने भी उसे मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज मीणा ने कहा कि सरकार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को पुनर्वास सहायता, रोजगार के अवसर और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि वे सामान्य और सम्मानजनक जीवन जी सकें। हाल के वर्षों में कई राज्यों में सरकारों ने माओवादी कैडरों को मुख्यधारा में लाने के लिए पुनर्वास योजनाओं पर विशेष जोर दिया है।
उन्होंने जंगलों में सक्रिय अन्य माओवादी कैडरों से भी हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करने और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ने की अपील की। अधिकारियों का मानना है कि लगातार हो रहे आत्मसमर्पण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाली और सामान्य स्थिति कायम करने की दिशा में सकारात्मक संकेत हैं। हाल के महीनों में महिला माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण के कई मामले सामने आए हैं।
इस दौरान चिंतूर उपमंडल के एएसपी हेमंत, एटापाका के एसआई अप्पाला राजू, 141 बटालियन के डिप्टी कमांडेंट पत्रास पुर्ती, 212 बटालियन के डिप्टी कमांडेंट अजय प्रताप सिंह और सहायक कमांडेंट राकेश लांबा सहित कई पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में लगातार अभियान चलाकर माओवादी नेटवर्क को कमजोर किया जा रहा है। वहीं आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास भी तेज किए गए हैं।


