राधे पटेल/गरियाबंद गरियाबंद : भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में आज का दिन अत्यंत गरिमामय है। देशभर में भगवान विष्णु के छठे अवतार, महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र, भगवान परशुराम का जन्मोत्सव पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। NEWS VEB की इस विशेष प्रस्तुति में हम उस महान व्यक्तित्व के आदर्शों का स्मरण कर रहे हैं, जिन्होंने समाज में समानता और न्याय की स्थापना के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
अन्याय के विरुद्ध एक वैचारिक क्रांति भगवान परशुराम को अक्सर उनके परशु (फरसे) और क्रोध के लिए जाना जाता है, लेकिन उनका वास्तविक संदेश इससे कहीं अधिक गहरा है। वे शास्त्र (ज्ञान) और शस्त्र (शक्ति) के अद्भुत संगम हैं। उनका जीवन स्पष्ट करता है कि शक्ति का उपयोग केवल तब होना चाहिए जब व्यवस्था अत्याचारी हो जाए और निर्बलों का शोषण होने लगे। उन्होंने सत्ता के अहंकार को तोड़कर यह संदेश दिया कि न्याय और धर्म से ऊपर कोई नहीं है।
वर्तमान परिदृश्य में प्रासंगिकता आज के आधुनिक समाज में, जहाँ कई बार मानवीय मूल्य कमजोर पड़ते दिखाई देते हैं, भगवान परशुराम की न्यायप्रियता एक मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में कार्य करती है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि समाज के हर नागरिक को अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए और एक ऐसे समाज के निर्माण में योगदान देना चाहिए जो नैतिक मूल्यों पर आधारित हो।
कल्याण की कामना इस पावन पर्व पर देश भर के मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और पूजा-अर्चना की जा रही है। NEWS VEB परिवार की ओर से हमारे सभी सुधी पाठकों और दर्शकों को भगवान परशुराम जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ। हम प्रार्थना करते हैं कि न्याय और धर्म के इस सर्वोच्च प्रतीक का आशीर्वाद संपूर्ण राष्ट्र पर बना रहे, और देश प्रगति, शांति तथा जन-कल्याण के मार्ग पर निरंतर अग्रसर रहे।


