धर्मजयगढ़ वन मंडल में लगातार हो रही हाथियों और शावकों की रहस्यमयी मौतें, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े
रायगढ़: जिले के धर्मजयगढ़ वन मंडल से एक बार फिर हाथी शावक की मौत की खबर सामने आने के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लगातार हो रही हाथियों और उनके शावकों की रहस्यमयी मौतों ने वन्यजीव संरक्षण के दावों की पोल खोल दी है। हालात ऐसे हैं कि कुछ ही दिनों के भीतर हाथी शावक की मौत का यह तीसरा मामला सामने आया है।
जानकारी के मुताबिक शावक का शव जंगल क्षेत्र में एक गहरे गड्ढे में पड़ा मिला। बताया जा रहा है कि यह कोई प्राकृतिक तालाब या डबरी नहीं थी, बल्कि रेलवे लाइन निर्माण कार्य के दौरान मिट्टी निकालने के लिए खोदा गया गड्ढा था। आरोप है कि संबंधित ठेकेदार ने परिवहन खर्च बचाने के लिए आसपास से मिट्टी खोदकर कार्य कराया था, जिसके बाद यह गड्ढा खुला छोड़ दिया गया। आशंका जताई जा रही है कि इसी गड्ढे में गिरने से शावक की मौत हुई।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों और वन्यजीव प्रेमियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि जंगल और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए शासन हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च करता है, लेकिन इसके बावजूद वन विभाग जंगलों और वन्य प्राणियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम साबित हो रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि लगातार हो रही हाथियों की मौतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई। हर घटना के बाद जांच की बात जरूर सामने आती है, लेकिन न तो लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय होती है और न ही ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी जंगलों में निगरानी बढ़ाने के बजाय केवल औपचारिकताओं तक सीमित हैं। यदि संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित मॉनिटरिंग होती, तो शायद इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता था।
धर्मजयगढ़ वन मंडल में लगातार हो रही हाथियों और शावकों की मौत अब केवल एक सामान्य घटना नहीं रह गई है, बल्कि यह वन प्रबंधन व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनती जा रही है। लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि आखिर इन मौतों के पीछे केवल लापरवाही है या फिर कोई बड़ा भ्रष्टाचार और साजिश छिपी हुई है।
वन विभाग फिलहाल मामले की जांच की बात कह रहा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है—आखिर हाथियों की मौत का यह सिलसिला कब थमेगा?


