गरियाबंद — शारीरिक अक्षमता कभी भी प्रतिभा और मेहनत के आड़े नहीं आ सकती, यदि सही मार्गदर्शन और आर्थिक संबल प्राप्त हो। इसी विचार को धरातल पर उतारते हुए गरियाबंद जिले में दिव्यांगजनों के आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक उत्कृष्ट कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यहाँ अपने स्वरोजगार के लिए लिए गए ऋण को निर्धारित समय सीमा में सफलतापूर्वक चुकाने वाले दिव्यांग हितग्राहियों का भव्य सम्मान किया गया। यह कार्यक्रम केवल एक सम्मान समारोह नहीं था, बल्कि समाज के उस वर्ग के लिए एक प्रेरणादायी मंच था जो स्वयं के व्यवसाय से अपनी तकदीर लिख रहे हैं।
स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम (रायपुर) के अध्यक्ष श्री लोकेश कावड़िया ने जिले के अपने विशेष प्रवास के दौरान दिव्यांगजनों से सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि दिव्यांगजन समाज की मुख्यधारा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अभिन्न हिस्सा हैं।
श्री कावड़िया ने शासन द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी और स्वरोजगार योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि:
राज्य शासन और निगम का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें उद्यमी बनाकर समाज में एक सम्मानजनक स्थान दिलाना है।
योजनाओं का सही लाभ उठाकर कोई भी दिव्यांग व्यक्ति अपने परिवार का मजबूत आर्थिक आधार बन सकता है।
“शारीरिक चुनौतियां हमारी क्षमता को सीमित नहीं करतीं। शासन की योजनाओं का सही उपयोग कर हमारे दिव्यांग भाई-बहन न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि वे समाज के लिए भी एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं।” — श्री लोकेश कावड़िया, अध्यक्ष, दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम
आर्थिक अनुशासन की मिसाल बने हितग्राही
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण उन दिव्यांग हितग्राहियों का सम्मान रहा, जिन्होंने निगम से ऋण प्राप्त कर न केवल अपना रोजगार सफलतापूर्वक स्थापित किया, बल्कि उत्कृष्ट आर्थिक अनुशासन का परिचय देते हुए समय से पहले या निर्धारित समय पर अपने पूरे ऋण की अदायगी कर दी।
अध्यक्ष श्री कावड़िया ने इन सभी ऋणमुक्त हितग्राहियों को प्रतीक चिन्ह (मोमेंटो) भेंट कर सम्मानित किया। सम्मानित होने वाले प्रमुख हितग्राही इस प्रकार हैं:
ताम्रध्वज साहू
धर्मेन्द्र उईके
अंबिका शर्मा
कल्पना भोसले
इन लाभार्थियों की सफलता की कहानियों ने यह साबित कर दिया कि सही समय पर मिली आर्थिक सहायता और व्यक्ति की अपनी लगन से किसी भी व्यवसाय को सफलता के शिखर तक ले जाया जा सकता है।
कलेक्टर की अपील: “एक की ऋण वापसी, दूसरे के लिए अवसर”
इस गरिमामयी अवसर पर गरियाबंद जिले के कलेक्टर श्री बी.एस. उईके ने भी ऋण मुक्त हुए सभी हितग्राहियों को उनकी इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए अन्य दिव्यांगजनों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया।
कलेक्टर श्री उईके ने कहा कि जो हितग्राही निर्धारित समय पर अपना ऋण जमा करते हैं, वे केवल स्वयं को ही ऋणमुक्त नहीं करते, बल्कि उस राशि से निगम को अन्य जरूरतमंद दिव्यांगजनों की सहायता करने का अवसर भी प्रदान करते हैं। उन्होंने मंच से अपील की कि जो साथी अभी तक ऋण की किस्तें नियमित रूप से जमा नहीं कर रहे हैं, वे इन सफल हितग्राहियों से प्रेरणा लें और समयबद्ध अदायगी कर ऋणमुक्त होने का प्रयास करें।
सार्थक संवाद और समस्याओं का त्वरित समाधान
समारोह के दौरान एक इंटरैक्टिव सत्र (संवाद कार्यक्रम) का भी आयोजन किया गया, जिसने इस कार्यक्रम की सार्थकता को और बढ़ा दिया।
योजनाओं की जानकारी: अधिकारियों द्वारा दिव्यांगजनों को राज्य और केंद्र सरकार की विभिन्न नई योजनाओं, सब्सिडी और कौशल विकास कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से बताया गया।
समस्याओं की सुनवाई: उपस्थित दिव्यांगजनों ने अपनी व्यक्तिगत और रोजगार संबंधी समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष रखा, जिन पर सकारात्मक चर्चा कर त्वरित समाधान का आश्वासन दिया गया।
अनुभव साझा करना: कई हितग्राहियों ने मंच पर आकर निगम से मिले सहयोग और अपने संघर्ष से सफलता तक की यात्रा को साझा किया, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को प्रेरित किया।

कार्यक्रम में प्रमुख उपस्थितियां
इस सफल और प्रेरणादायी आयोजन में जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्न अधिकारी उपस्थित रहे:
श्री प्रखर चन्द्राकर (मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत)
श्री पंकज वर्मा (प्रबंध संचालक)
श्री डी.पी. ठाकुर (उप संचालक, समाज कल्याण विभाग)
इसके साथ ही भारी संख्या में अन्य अधिकारी-कर्मचारीगण और जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए दिव्यांगजन उपस्थित थे। यह आयोजन इस बात का प्रतीक बन गया कि प्रशासन की संवेदनशीलता और नागरिकों की इच्छाशक्ति मिलकर किसी भी शारीरिक या आर्थिक बाधा को पार कर सशक्त समाज का निर्माण कर सकते हैं।






