‘वोट चोरी’ का आरोप लगाकर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन; मतदाता सूची से हटाए गए नाम बहाल करने, चुनाव सुधार और प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई रोकने की मांग
गरियाबंद। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देशभर में जारी विरोध के बीच गरियाबंद जिले के मैनपुर में भी किसान और आदिवासी संगठनों ने विरोध दर्ज कराया। संयुक्त किसान मोर्चा और अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को प्रतिनिधिमंडल मैनपुर एसडीएम कार्यालय पहुंचा। यहां प्रदर्शन के बाद जिला कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई, मतदाता सूची से हटाए गए वास्तविक मतदाताओं के नाम बहाल करने और चुनाव प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसके माध्यम से बड़ी संख्या में नागरिकों के मताधिकार को प्रभावित किया जा रहा है। हालांकि, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर लगाए गए आरोप संगठनों का पक्ष हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
SIR को लेकर उठाए सवाल, मताधिकार बहाली की मांग
संगठनों ने अपने ज्ञापन में दावा किया कि SIR के दौरान देशभर में 13.14 करोड़ वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए गंभीर खतरा बताते हुए हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम तत्काल बहाल करने की मांग की।
ज्ञापन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर संवैधानिक जिम्मेदारियों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया गया। संगठनों ने उनके इस्तीफे के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई की मांग भी रखी। इसके अलावा, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानून में संशोधन और चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग की गई।
चुनाव सुधार और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली लागू करने की मांग
किसान और आदिवासी संगठनों ने चुनाव सुधारों को लेकर भी कई मांगें उठाईं। इनमें आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली लागू करना, चुनाव में धनबल और बाहुबल के प्रभाव पर अंकुश लगाना तथा चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना शामिल है।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र नागरिक को बिना किसी भेदभाव के मतदान का अधिकार मिलना चाहिए। मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधित करने की प्रक्रिया स्पष्ट एवं जवाबदेह होनी चाहिए, ताकि किसी पात्र मतदाता को अपने अधिकार से वंचित न होना पड़े।
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई का भी विरोध
ज्ञापन में दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों, युवाओं, महिलाओं और पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार तथा लाठीचार्ज की घटनाओं की निंदा की गई। संगठनों ने शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को सुनिश्चित करने और कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर घरों में नजरबंद किए जाने जैसी कार्रवाई बंद करने की मांग की।
उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के अधिकार को बहाल करने की भी अपील की। संगठनों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी मांगें शांतिपूर्वक रखने और सरकार तक अपनी बात पहुंचाने का अधिकार मिलना चाहिए।
ये पदाधिकारी रहे मौजूद
मैनपुर एसडीएम कार्यालय में ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रताप मरकाम (जनपद सदस्य एवं अध्यक्ष, आदिवासी विकास परिषद, विकासखंड मैनपुर), महेंद्र नेताम (संरक्षक, आदिवासी विकास परिषद, जिला गरियाबंद), गज्जू नेगी (अध्यक्ष, युवा प्रभाग एवं सरपंच, मैनपुर कला), युवराज नेताम (राष्ट्रीय अध्यक्ष, आदिवासी भारत महासभा), लाल सिंह नागेश, परमेश्वर मरकाम, पदम लाल नेताम, घनश्याम नागेश, दौलत नेताम, मंगल शोरी और घनश्याम मरकाम सहित संयुक्त किसान मोर्चा एवं आदिवासी विकास परिषद के पदाधिकारी और स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।
अब मांगों पर कार्रवाई का इंतजार
मैनपुर में सौंपे गए ज्ञापन के जरिए किसान और आदिवासी संगठनों ने मताधिकार की सुरक्षा, चुनाव सुधार और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। अब देखना होगा कि ज्ञापन में रखी गई मांगों पर संबंधित स्तर से क्या कदम उठाए जाते हैं।




