राधे पटेल / गरियाबंद गरियाबंद के मैनपुर क्षेत्र से प्रशासनिक नाकामी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां की जनता इन दिनों ‘लो वोल्टेज’ की भयंकर समस्या से जूझ रही है, और बिजली विभाग रहस्यमयी तरीके से मौन साधे बैठा है। ग्रामीण उपभोक्ताओं के घरों में बल्ब सिर्फ टिमटिमा रहे हैं, लेकिन जब बिल भरने की बारी आती है, तो विभाग पूरी वसूली करता है।
बहानेबाजी की खुली पोल: कहां गई 132 KV की बिजली?
इस ज्वलंत मुद्दे पर जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने सख्त नाराजगी जताते हुए बिजली विभाग के दावों की हवा निकाल दी है। उन्होंने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि पहले जब सड़ौली से बिजली सप्लाई होती थी, तब विभाग बहाना बनाता था कि क्षेत्र बड़ा होने के कारण वोल्टेज ड्रॉप हो जाता है।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इस समस्या को खत्म करने के लिए इंदागांव में करोड़ों की लागत से 132 केवी का विद्युत उपकेंद्र स्थापित किया गया। आज इस उपकेंद्र को बने तीन साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन मैनपुर क्षेत्र में लो वोल्टेज की बीमारी जस की तस बनी हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वो भारी-भरकम बिजली जा कहां रही है? क्या यह 132 KV का उपकेंद्र सिर्फ एक ‘सफेद हाथी’ बनकर रह गया है?
जनता के साथ धोखा, बर्दाश्त नहीं होगा अन्याय
संजय नेताम ने कड़े शब्दों में कहा कि विभाग के अधिकारियों को लगातार इस विकराल समस्या से अवगत कराया जा रहा है, लेकिन उनके कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। ग्रामीण उपभोक्ता हर महीने अपनी गाढ़ी कमाई से बिजली बिल का नियमित भुगतान कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें पर्याप्त वोल्टेज न देना सरासर अन्याय और उनके अधिकारों का हनन है।
नेताम ने बिजली विभाग को सख्त अल्टीमेटम दिया है कि मैनपुर क्षेत्र में लो वोल्टेज की समस्या का तत्काल प्रभाव से स्थायी समाधान किया जाए। यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो त्रस्त जनता और जनप्रतिनिधियों को मजबूरन उग्र रुख अपनाना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग की होगी।


