राधे पटेल/ गरियाबंदगरियाबंद। छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य माना जाता है, और इन्हीं संसाधनों में एक महत्वपूर्ण नाम है — तेंदूपत्ता, जिसे यहां “हरा सोना” कहा जाता है। यह सिर्फ एक वन उपज नहीं, बल्कि लाखों आदिवासी और ग्रामीण परिवारों की आजीविका का प्रमुख साधन है।
क्या है तेंदूपत्ता?
तेंदूपत्ता (Diospyros melanoxylon) एक गैर-काष्ठ वन उत्पाद (NTFP) है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से बीड़ी बनाने में किया जाता है।
यह मध्य भारत के जंगलों में बड़े पैमाने पर पाया जाता है और इसकी गुणवत्ता के लिए छत्तीसगढ़ देशभर में प्रसिद्ध है।
क्यों कहा जाता है “हरा सोना”?
छत्तीसगढ़ देश के सबसे बड़े तेंदूपत्ता उत्पादक राज्यों में शामिल है।
- राज्य में हर साल लगभग 16–17 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रह होता है
- यह देश के कुल उत्पादन का करीब 20% हिस्सा है
- तेंदूपत्ता से राज्य में सैकड़ों करोड़ रुपये का व्यापार होता है
इसी आर्थिक महत्व के कारण इसे “हरा सोना” कहा जाता है।
लाखों परिवारों की आजीविका
तेंदूपत्ता संग्रहण से छत्तीसगढ़ में लाखों परिवार जुड़े हुए हैं।
- करीब 10 लाख से अधिक लोग हर साल इस कार्य से लाभान्वित होते हैं
- यह कार्य अप्रैल से जून तक चलता है
- आदिवासी और ग्रामीण परिवारों के लिए यह सबसे बड़ा मौसमी रोजगार है
गरियाबंद और आसपास के क्षेत्रों में महत्व
गरियाबंद, देवभोग, मैनपुर और बस्तर जैसे क्षेत्रों में तेंदूपत्ता संग्रहण
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है
यहां के कई गांवों में लोग इसे “जंगल का ATM” भी कहते हैं, क्योंकि इससे तुरंत नकद आय होती है।
चुनौतियां भी कम नहीं
तेंदूपत्ता से जुड़ी कई समस्याएं भी सामने आती रही हैं—
- तस्करी (Smuggling): अधिक कीमत के कारण पड़ोसी राज्यों से अवैध व्यापार बढ़ता है
- कम मजदूरी: मेहनत के मुकाबले मजदूरी कम होने की शिकायत
- बाजार पर निर्भरता: बीड़ी उद्योग पर निर्भरता
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों के अनुसार, तेंदूपत्ता का उपयोग सिर्फ बीड़ी तक सीमित नहीं है।
- इससे हर्बल उत्पाद, पैकेजिंग और अन्य पर्यावरण अनुकूल उत्पाद बनाए जा सकते हैं
- इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है
तेंदूपत्ता छत्तीसगढ़ के लिए सिर्फ एक वन उपज नहीं…
बल्कि यह आदिवासी जीवन, ग्रामीण रोजगार और राज्य की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार है।
“हरा सोना” कहलाने वाला यह तेंदूपत्ता
लाखों परिवारों की रोजी-रोटी का सहारा बना हुआ है और आने वाले समय में इसके और भी बड़े आर्थिक महत्व की संभावना है।


