राधे पटेल / गरियाबंद गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक अंतर्गत ओडिशा सीमा से लगे ग्राम बिरीघाट में विकास कार्यों की जमीनी हकीकत सरकारी दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। यहां पिछले लगभग 4 वर्षों से पंचायत भवन का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि निर्माण कार्य की आधे से अधिक राशि का आहरण पहले ही किया जा चुका है। इसके बावजूद आज तक भवन पूर्ण नहीं हो पाया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि ओडिसा सीमा क्षेत्र के कई गांवों में यही स्थिति देखने को मिल रही है, जहां निर्माण कार्य अधूरा छोड़कर कागजों में राशि का बंदरबांट कर दिया जाता है और संबंधित विभाग मौन बना रहता है। बिरीघाट पंचायत में भी कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है।

पंचायत भवन अधूरा होने के कारण वर्तमान में पंचायत का संचालन आंगनबाड़ी भवन में किया जा रहा है, जबकि आंगनबाड़ी केंद्र पुराने जर्जर पंचायत भवन में संचालित हो रहा है। टूटती दीवारों और खस्ताहाल भवन के बीच छोटे बच्चों को बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा और भविष्य दोनों खतरे में नजर आ रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक आंखें मूंदे बैठा हुआ है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर महिला एवं बाल विकास विभाग और संबंधित निर्माण एजेंसी इस गंभीर समस्या पर ध्यान क्यों नहीं दे रही है?
इतना ही नहीं, पंचायत भवन के पीछे बनाए जाने वाले

का भी यही हाल है। ग्रामीणों के अनुसार शौचालय निर्माण की पूरी राशि निकाल ली गई, लेकिन मौके पर केवल आधी छत डालकर काम को अधूरा छोड़ दिया गया। अब यह निर्माण भी वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी नाराजगी है कि जब निर्माण कार्य की राशि समाप्त हो चुकी है, तो आखिर अधूरे पड़े इन कार्यों को पूरा कब किया जाएगा? जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी भी या नहीं? यदि होगी तो कब?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पिछले 4 वर्षों में आखिर इन निर्माण कार्यों की जांच क्यों नहीं हुई? क्या विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण ग्रामीणों को आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है?
अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर जांच और कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
बिरीघाट ग्राम पंचायत मैनपुर ब्लॉक अंतर्गत आने वाला गांव है।

