राधे पटेल / गरियाबंद“18 महीने से ठप पड़े विकास कार्य”, जनपद परिसर में धरने पर बैठे पंचायत प्रतिनिधि, उग्र आंदोलन की चेतावनी
गरियाबंद। छत्तीसगढ़ सरकार जहां “सुशासन तिहार 2026” के जरिए गांव-गांव पहुंचकर जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान और विकास कार्यों में तेजी लाने का दावा कर रही है, वहीं देवभोग ब्लॉक में इसका उल्टा नजारा देखने को मिला। ब्लॉक मुख्यालय मांडागांव में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम से दूरी बनाते हुए 53 ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने जनपद पंचायत परिसर में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। पंचायत प्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन पर विकास कार्यों की अनदेखी, फाइलों को लंबित रखने और पंचायतों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का गंभीर आरोप लगाया।

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शुरू किए गए “सुशासन तिहार 2026” का उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध समाधान, योजनाओं की समीक्षा और विकास कार्यों में तेजी लाना बताया गया है। लेकिन देवभोग में पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि जमीनी स्तर पर हालात इसके विपरीत हैं और गांवों के विकास कार्य महीनों से ठप पड़े हुए हैं।
धरना स्थल पर पहुंचे सरपंचों ने कहा कि पिछले लगभग 18 महीनों से मनरेगा के तहत एक भी बड़ा निर्माण कार्य, पुल-पुलिया या विकास योजना स्वीकृत नहीं हुई है। पंचायतों द्वारा भेजे गए प्रस्ताव और विकास कार्यों की फाइलें लगातार दफ्तरों में लंबित पड़ी हैं। इससे गांवों में सड़क, पुलिया, नाली और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों को रोजमर्रा की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जबकि पंचायत प्रतिनिधि लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
धरना प्रदर्शन के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नाराजगी जाहिर की। सरपंच संघ के सदस्यों ने कहा कि पंचायतें ग्रामीण विकास की सबसे अहम इकाई हैं, लेकिन आज पंचायत प्रतिनिधियों की ही सुनवाई नहीं हो रही। समय पर राशि उपलब्ध नहीं होने और योजनाओं का भुगतान लंबित रहने से विकास कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं।
धरना स्थल पर मौजूद पंचायत प्रतिनिधियों में पवन यादव, तूलेश्वरी माझी, परमानंद नागेश, विश्वजीत ठाकुर, ठुकेलश धुर्वा और छायासन सोनवानी सहित कई सरपंचों ने कहा कि कई बार अधिकारियों को मांगों और समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। मजबूर होकर उन्हें सुशासन तिहार जैसे सरकारी कार्यक्रम से दूरी बनाकर विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।
सरपंच संघ ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए लंबित विकास कार्यों की तत्काल स्वीकृति, निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक राशि और सामग्री उपलब्ध कराने, पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं की सुनवाई सुनिश्चित करने तथा मनरेगा और अन्य योजनाओं के रुके भुगतान जल्द जारी करने की मांग की है।
एक पंचायत प्रतिनिधि ने धरना स्थल पर कहा,
“जब गांवों के चुने हुए प्रतिनिधियों की ही सुनवाई नहीं होगी, तो फिर सुशासन का दावा कैसे सफल माना जाए?”
पूर्व विधायक गोवर्धन मांझी ने सुशासन तिहार अमलीपदर में कहा की अधिकारी हमारे फ़ोन नहीं उठाते। …
सरपंचों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत स्तर पर विकास की गति लगभग थम चुकी है। गांवों में छोटे-छोटे निर्माण कार्यों के लिए भी महीनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। इसका सीधा असर ग्रामीणों पर पड़ रहा है, खासकर उन इलाकों में जहां सड़क और पुल-पुलिया जैसी सुविधाएं पहले से कमजोर हैं।
गौरतलब है कि “सुशासन तिहार 2026” के तहत सरकार ने दावा किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह में समाधान शिविर लगाए जा रहे हैं और मौके पर ही समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। लेकिन देवभोग में पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि वास्तविक समस्याएं अब भी फाइलों में दबकर रह गई हैं।
धरना प्रदर्शन के दौरान सरपंच संघ ने साफ चेतावनी दी कि यदि आने वाले सप्ताह में पंचायतों के निर्माण कार्यों को स्वीकृति नहीं दी गई और मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। पंचायत प्रतिनिधियों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में यह विरोध तहसील स्तर से जिला स्तर तक फैल सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि पंचायतों में विकास कार्य रुकने का सीधा असर ग्रामीण जनता पर पड़ रहा है।


