सुकमा। एक ओर सरकार बस्तर के विकास को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर सुकमा जिले की ऐतिहासिक और संवेदनशील झीरम घाटी की सड़कें इन दावों की हकीकत बयां करती नजर आ रही हैं। झीरम घाटी की मुख्य सड़क जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
झीरम घाटी वह क्षेत्र है जिसने नक्सल हिंसा की कई दर्दनाक घटनाओं को देखा/ साहा है। वर्ष 2013 में हुए झीरम घाटी नक्सली हमले में लगभग 33 जवानों की जान गई थी, जिसके कारण यह क्षेत्र पूरे देश में चर्चित रहा हैं ।
वर्तमान में घाटी की सड़क की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे और उखड़ी हुई सतह वाहन चालकों के लिए खतरा बन गई है। बरसात के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटनाओं की आशंका और बढ़ जाती है।
झीरम घाटी में कई स्थानों पर अंधे मोड़ हैं, जहां खराब सड़क के कारण वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है। ऐसे में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। घाटी क्षेत्र होने के कारण सड़क की खराब स्थिति इसे और अधिक खतरनाक बना रही है।

सड़क की मरम्मत और उचित रखरखाव को लेकर जिम्मेदार विभाग गंभीर नजर नहीं आ रहा है। कांकेर वैल्ली जैसे नेशनल पार्क होने बावजूद सड़क की हालत में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है। शासन-प्रशासन झीरम घाटी सड़क का तत्काल मरम्मत कार्य कराने और सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करें ।
ग्रामीणों और यात्रियों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो आने वाले मानसून में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।



