गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के बीच 108 एंबुलेंस टीम ने मानवता और साहस की मिसाल पेश की। आंधी-तूफान के कारण रास्ते में विशाल पेड़ गिरने से आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया था। इसके बावजूद टीम ने हार नहीं मानी और पेड़ों को काटकर प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला तक पहुंच बनाई। इसके बाद प्रसूता को एंबुलेंस से मैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए रवाना किया गया।
रास्ते में गिरे थे विशाल पेड़, हर कदम पर थी चुनौती
चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से आमामोरा पहाड़ी क्षेत्र के ग्राम कुकरार जाने वाले मार्ग पर कई विशाल पेड़ गिर गए थे। तेज हवाओं के चलते रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका था।
इसी दौरान ग्राम कुकरार निवासी उमन बाई, पति मोहन लाल भुंजिया को प्रसव पीड़ा होने लगी। महिला को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी था, लेकिन रास्ता बंद होने के कारण एंबुलेंस का गांव तक पहुंचना मुश्किल हो गया था।
ऐसी विषम परिस्थितियों में भी 108 एंबुलेंस के कर्मचारियों ने पीछे हटने के बजाय रास्ता साफ करने का निर्णय लिया। टीम ने रास्ते में गिरे पेड़ों को काटा और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से एक-एक बाधा पार करते हुए प्रसूता के घर तक पहुंचने में सफलता हासिल की।
स्थानीय ग्रामीणों ने भी बढ़ाया मदद का हाथ
इस चुनौतीपूर्ण अभियान में 108 एंबुलेंस के पायलट प्रकाश साहू और ईएमटी हेमंत कुमार साहू ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उनके साथ दुर्गेश पुरेना, सीएचओ, एसएचसी ओढ़ तथा आमामोरा निवासी भुनेश्वर यादव, राजेंद्र यादव और गौरसिंह भुंजिया ने भी सहयोग किया।
सभी ने मिलकर रास्ते में गिरे पेड़ों को हटाने और एंबुलेंस के आवागमन का रास्ता बनाने में मदद की। स्थानीय लोगों के सहयोग से आखिरकार एंबुलेंस प्रसूता तक पहुंच सकी।
सुबह 6:27 से 8:15 बजे तक चला साहसिक अभियान
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 108 एंबुलेंस वाहन क्रमांक CG04 QA 2081 के माध्यम से सुबह 6:27 बजे अभियान शुरू किया गया। करीब 8:15 बजे तक टीम ने दुर्गम पहाड़ी रास्ते की बाधाओं को पार करते हुए प्रसूता तक पहुंचने और उसे अस्पताल ले जाने की कार्रवाई पूरी की।
इसके बाद उमन बाई को एंबुलेंस से मैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए रवाना किया गया।
प्राकृतिक आपदा के बीच 108 टीम की तत्परता आई काम
चक्रवाती तूफान के कारण जहां पहाड़ी क्षेत्रों में आवागमन बाधित था, वहीं दूसरी ओर प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाना भी जरूरी था।
ऐसे कठिन समय में 108 एंबुलेंस कर्मचारियों और स्थानीय ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की अहमियत को सामने रखा।
कुकरार की इस घटना में एंबुलेंस टीम ने दिखाया कि प्राकृतिक आपदा और दुर्गम रास्तों जैसी चुनौतियों के बावजूद आपसी सहयोग, साहस और तत्परता से जरूरतमंदों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकती हैं।






