9.42 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत भवन के लिए 7.54 लाख जारी, फिर भी निर्माण अधूरा; कुंडेरापानी के बच्चे 2 किमी पैदल चलकर दूसरे गांव में पढ़ने को मजबूर
गरियाबंद। विकासखंड मुख्यालय मैनपुर से करीब 80 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत मुड़ागांव के आश्रित ग्राम कुंडेरापानी में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली सामने आई है। यहां सर्व शिक्षा अभियान के तहत स्वीकृत प्राथमिक स्कूल का भवन पिछले चार वर्षों से अधूरा पड़ा है। स्थिति यह है कि जिस मैदान में बच्चों को खेलना चाहिए, वहां धान की फसल लहलहा रही है। भवन नहीं होने के कारण गांव के बच्चे रोजाना करीब 2 किलोमीटर पैदल चलकर दूसरे स्कूल में पढ़ने जाने को मजबूर हैं।
ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वीकृत इस भवन का निर्माण वर्षों बाद भी पूरा नहीं हो सका है। इससे न केवल सरकारी निर्माण कार्यों की प्रगति पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
9.42 लाख की लागत, 7.54 लाख जारी; फिर भी अधूरा निर्माण
कुंडेरापानी में कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चों के लिए सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्राथमिक स्कूल भवन स्वीकृत किया गया था। भवन की कुल स्वीकृत लागत 9 लाख 42 हजार 500 रुपये बताई गई है। निर्माण एजेंसी को अब तक 7 लाख 54 हजार रुपये जारी किए जा चुके हैं, जो स्वीकृत लागत का लगभग 80 प्रतिशत है।
इसके बावजूद चार साल बीत जाने पर भी भवन का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। सवाल यह है कि जब निर्माण के लिए स्वीकृत राशि का बड़ा हिस्सा जारी हो चुका है, तो भवन अब तक अधूरा क्यों है? निर्माण कार्य में देरी के लिए जिम्मेदार कौन है और बच्चों को स्कूल भवन की सुविधा कब तक मिलेगी?
निर्माण में हो रही देरी का खामियाजा गांव के मासूम बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। उन्हें रोजाना पैदल दूरी तय कर दूसरे स्कूल जाना पड़ता है। बारिश, गर्मी और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों में यह परेशानी और बढ़ जाती है।
उद्घाटन से पहले ही खराब होने लगे दरवाजे-खिड़कियां
अधूरे पड़े स्कूल भवन की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। जानकारी के मुताबिक, भवन में लगाए गए दरवाजे और खिड़कियां उपयोग शुरू होने से पहले ही खराब होने लगे हैं। कई जगह दरवाजे टूटने और खिड़कियों में जंग लगने की शिकायत सामने आई है।
लाखों रुपये की लागत से बन रहे स्कूल भवन की ऐसी स्थिति निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते मरम्मत और निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया गया, तो भवन को और नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता की जांच और अब तक खर्च की गई राशि का हिसाब सामने आना जरूरी है।
स्कूल के मैदान में खेती, बच्चों के खेलने की जगह पर धान
स्कूल भवन अधूरा होने के साथ ही परिसर के लिए निर्धारित मैदान पर भी कब्जे की स्थिति बताई जा रही है। स्थानीय किसानों द्वारा मैदान में धान की खेती किए जाने की जानकारी सामने आई है। जिस जगह बच्चों के खेलने और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए उपयोग होना चाहिए, वहां फसल उगाई जा रही है।
इस स्थिति ने शिक्षा और राजस्व विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, जमीन के स्वामित्व और अतिक्रमण की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि तथा जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय की जा सकती है। प्रशासन के सामने अब यह चुनौती है कि स्कूल की जमीन की स्थिति स्पष्ट कराई जाए और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।
जिम्मेदार बोले—मामले की जांच कराऊंगा
मामले को लेकर जिला पंचायत गरियाबंद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) प्रखर चंद्राकर ने कहा, “मामला संज्ञान में आया है। मैं इस पूरे प्रकरण की जांच कराता हूं।”
अधिकारी के इस आश्वासन के बाद अब ग्रामीणों की नजर जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर है। देखना होगा कि अधूरे भवन के निर्माण को पूरा कराने, निर्माण की गुणवत्ता की जांच करने और मैदान से संबंधित शिकायत का निराकरण करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
चार साल बाद भी समाधान का इंतजार
कुंडेरापानी का यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के बुनियादी ढांचे की स्थिति और सरकारी निर्माण कार्यों की निगरानी को लेकर कई अहम सवाल खड़े करता है। जब भवन के लिए स्वीकृत राशि का बड़ा हिस्सा जारी हो चुका है, तब भी बच्चों को अपने गांव में स्कूल की सुविधा नहीं मिलना चिंता का विषय है।
अब सवाल है कि 7.54 लाख रुपये जारी होने के बावजूद निर्माण कार्य चार साल से अधूरा क्यों है? क्या निर्माण में संभावित वित्तीय अनियमितताओं और गुणवत्ता संबंधी कमियों की जांच होगी? स्कूल के मैदान से जुड़ी शिकायत पर कार्रवाई कब होगी? और सबसे अहम, कुंडेरापानी के बच्चों को अपने गांव में पढ़ने की सुविधा आखिर कब मिलेगी?
ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन की जांच केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अधूरे स्कूल भवन को पूरा कराने और बच्चों की परेशानी दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।




