टंकी के लिए खोदा गड्ढा बना खतरा, मच्छरों के पनपने से बीमारी की आशंका; विभाग बोला—पुराने ठेकेदार से रिकवरी के बाद होगा री-टेंडर
मैनपुर। सरकारी निर्माण कार्यों में देरी का खामियाजा अब आश्रम शाला में रहने वाले बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। ग्राम पंचायत छोटे गोबरा के आश्रित ग्राम बड़े गोबरा स्थित आश्रम शाला में शौचालय का निर्माण करीब 3 से 4 साल बाद भी अधूरा है। शौचालय की टंकी के लिए खोदा गया गड्ढा खुला पड़ा है, जिसमें पानी भरने से बच्चों की सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
एक ओर आश्रम में रहने वाले बच्चों को बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए, वहीं दूसरी ओर अधूरे निर्माण के कारण उन्हें संभावित खतरे के बीच रहना पड़ रहा है। सवाल यह है कि बच्चों की जरूरत से जुड़ा निर्माण कार्य वर्षों तक अधूरा कैसे पड़ा रहा और इसे पूरा करने के लिए अब तक प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए?
खुले गड्ढे में पानी, मच्छरों से बीमारी का खतरा
शौचालय निर्माण के लिए गड्ढा खोदने के बाद काम आगे नहीं बढ़ पाया। निर्माण स्थल पर न तो टंकी का काम पूरा हुआ और न ही शौचालय की दीवारें तैयार हो सकीं। वर्तमान में गड्ढे में पानी भरा होने से मच्छरों और अन्य कीड़े-मकोड़ों के पनपने की आशंका है।
आश्रम परिसर में बच्चों के खेलने-कूदने और आवाजाही के दौरान किसी बच्चे के गड्ढे में गिरने का खतरा भी बना हुआ है। ऐसे में सवाल केवल अधूरे निर्माण का नहीं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और स्वच्छता का भी है। विभाग को निर्माण पूरा कराने के साथ तत्काल गड्ढे की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत है।
पुराने ठेकेदार से वसूली के बाद होगा री-टेंडर
अधूरे शौचालय के संबंध में आदिम जाति कल्याण विभाग के परियोजना अधिकारी लोकेन्द्र पटेल ने बताया कि कार्य को दोबारा शुरू कराने के लिए री-टेंडर की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पहले पुराने ठेकेदार से राशि की रिकवरी की जाएगी। इसके बाद ही रुके हुए निर्माण कार्य को फिर से शुरू किया जा सकेगा।
कागजी प्रक्रिया कब खत्म होगी, बच्चों को सुविधा कब मिलेगी?
विभागीय स्तर पर रिकवरी और री-टेंडर की प्रक्रिया का हवाला दिया जा रहा है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी समस्या का तत्काल समाधान जरूरी है। निर्माण पूरा होने में और कितना समय लगेगा, इसकी स्पष्ट समय-सीमा सामने नहीं आई है।
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग खुले गड्ढे से बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल व्यवस्था करता है या नहीं और वर्षों से अधूरे पड़े शौचालय को पूरा कराने की दिशा में कब तक ठोस कार्रवाई होती है।




