मैनपुर विकासखंड के ग्राम उरमाल में गांव के बीचों-बीच और मुख्य सड़क से लगी शराब दुकान के संचालन को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शराब दुकान की मौजूदा लोकेशन के कारण गांव के लोगों, खासकर महिलाओं और बच्चों को आए दिन असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक शराब दुकान के आसपास नशे में लोगों की आवाजाही बनी रहती है। कई बार कथित रूप से गाली-गलौज, अभद्र भाषा और विवाद जैसी स्थिति निर्मित होने से गांव का माहौल प्रभावित होता है। ग्रामीणों का कहना है कि शराब की दुकान गांव के बीच और सड़क से लगी हुई होने के कारण आम लोगों की आवाजाही के दौरान भी परेशानी बनी रहती है।
शराब दुकान के दूसरी तरफ स्कूल, बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता
ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि शराब दुकान के दूसरी ओर स्कूल संचालित है, जहां बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ने के लिए पहुंचते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल आने-जाने वाले विद्यार्थियों को शराब दुकान के आसपास से होकर गुजरना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि नशे में मौजूद कुछ लोगों द्वारा बच्चों और महिलाओं के साथ कथित तौर पर बदसलूकी किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसे में स्कूल और आबादी के बीच शराब दुकान का संचालन किए जाने से बच्चों के सुरक्षित वातावरण और ग्रामीणों की सामाजिक सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आबकारी नियमों में ‘आपत्तिजनक स्थल’ का प्रावधान
छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग के उपलब्ध निर्देशों के अनुसार, छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम के तहत बनाए गए सामान्य प्रयोग नियमों के नियम 1(1) में निर्धारित आपत्तिजनक स्थानों पर फुटकर मदिरा दुकान और उससे संबंधित अहाता स्थापित नहीं किया जा सकता। विभागीय निर्देशों में ऐसे स्थान पर संचालित दुकान को नियमानुसार आपत्तिरहित स्थल पर स्थानांतरित करने की कार्रवाई किए जाने की बात भी कही गई है।
यानी केवल यह सवाल नहीं है कि शराब दुकान के पास स्कूल या आबादी है या नहीं, बल्कि मौके की वास्तविक स्थिति, निर्धारित दूरी, स्थल की प्रकृति और आबकारी नियमों के तहत उसकी पात्रता की जांच महत्वपूर्ण है।
सड़क से लगी दुकान पर भी नियमों की नजर
आबकारी विभाग के निर्देशों में राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के संबंध में भी दुकान की स्थिति को लेकर प्रावधान हैं। उपलब्ध निर्देशों के अनुसार राजमार्गों पर शराब बिक्री की दुकान के संबंध में दृश्यता, पहुंच और दूरी से जुड़े प्रतिबंध हैं। सामान्य तौर पर 500 मीटर की दूरी का प्रावधान है, जबकि 20 हजार या उससे कम आबादी वाले स्थानीय निकाय क्षेत्रों के लिए 220 मीटर की सीमा का उल्लेख है। हालांकि ये प्रावधान संबंधित मार्ग की श्रेणी और क्षेत्र की कानूनी स्थिति के आधार पर लागू होते हैं।
इसलिए उरमाल की दुकान किस सड़क से लगी है, वह सड़क किस श्रेणी में आती है और दुकान की वास्तविक दूरी कितनी है, इसकी विभागीय जांच जरूरी है।
ग्रामीण बोले- गांव से बाहर हो शराब दुकान
ग्रामीणों की मांग है कि आबकारी विभाग मौके का निरीक्षण करे और स्कूल, सड़क, आबादी तथा शराब दुकान की वास्तविक स्थिति का भौतिक सत्यापन कराए। यदि वर्तमान स्थान नियमों के लिहाज से आपत्तिजनक पाया जाता है तो दुकान को गांव की आबादी और स्कूल से दूर किसी उपयुक्त एवं आपत्तिरहित स्थल पर स्थानांतरित किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि शराब बिक्री से संबंधित सरकारी व्यवस्था अपनी जगह है, लेकिन दुकान की लोकेशन ऐसी होनी चाहिए जिससे महिलाओं, बच्चों, विद्यार्थियों और आम ग्रामीणों की सुरक्षा तथा सामाजिक वातावरण प्रभावित न हो।
अब आबकारी विभाग के निरीक्षण पर टिकी नजर
उरमाल के ग्रामीणों की शिकायत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आबकारी विभाग मौके का निरीक्षण कर वर्तमान स्थान को नियमों के अनुरूप मानता है या नहीं। यदि स्थल आपत्तिजनक पाया जाता है तो विभागीय नियमों के तहत स्थानांतरण की कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल ग्रामीणों ने आबकारी विभाग और प्रशासन से मौके की निष्पक्ष जांच कर शराब दुकान को गांव से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की है।




